अविचल पथ का पथिक रहूँ...

 

अविचल पथ का पथिक रहूँ,
चाहे जीवन अवसान पाए।
न ठहरूँ, न झुकूँ, न रुको मैं,
बस सतत संघर्ष निभाए।

पराजयों के साये घनेरे हों,
परंतु मैं विचलित न होऊँ।
हर हार में नव दीप जलाऊँ,
निज आत्मशक्ति को सँजोऊँ।

हे ईश्वर, वरदान दो ऐसा,
कि विपदाएँ भी वंदन करें।
कालचक्र की तीव्र आँधियाँ,
मुझे न किंचित कंपित करें।

नक्षत्रों में प्रखर प्रभा हो,
शनि सदैव शुभंकर रहे।
संकल्पों में दृढ़ता हो मेरी,
निज कर्मपथ उज्ज्वल रहे।

चाहे अनंत तमस घिर आए,
चाहे विधि भी राह रोके।
मैं अखंड ज्वाला-सा जलूँ,
स्वयं को अडिग, प्रखर भोगे।


रुपेश रंजन


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