Skip to main content

Posts

Featured

गांधी तो रोज़ ही मरता है इस देश में…

गांधी तो रोज़ ही मरता है इस देश में… गांधी तो रोज़ ही मरता है इस देश में, हर उस दिन जब भीड़ ताली बजाकर इंसानियत की फाँसी देखती है। किस–किस को गोडसे कहोगे? उस उँगली को जो पत्थर नहीं फेंकती पर रास्ता ज़रूर बताती है? उस आवाज़ को जो चीखती नहीं बस अफ़वाह को राष्ट्रीय गीत बना देती है? किस–किस को गोडसे कहोगे? उस क़लम को जो सच जानते हुए भी विज्ञापन लिखती है? उस कुर्सी को जो संविधान पर बैठकर न्याय को आदेश की तरह रद्द कर देती है? यहाँ गोली अब घटना नहीं, यहाँ रोज़मर्रा की आदत है, यहाँ हत्या पहले ज़ुबान में होती है और लाश बाद में गिरती है। गांधी मरता है जब डर हमारी भाषा बन जाता है, और चुप्पी को सभ्यता का नाम दिया जाता है। किस–किस को गोडसे कहोगे? जब आईने भी सवाल पूछने से डरने लगें। क्योंकि सच यह है— गोडसे कोई एक नहीं, वह हर वह जगह है जहाँ गांधी को अकेला छोड़ दिया गया। रूपेश रंजन

Latest posts

गांधी तो रोज़ ही मरता है इस देश में…

गांधी तो रोज़ ही मरता है…

रुकूँ या बढ़ जाऊँ....

किसी ने शायद गलत किया होगा...

तुम्हें नींद कैसे आ जाती है...

मुक्ति आवश्यक है...

ज़िंदगी थोड़े खत्म हो जाएगी।

वर्षांत की कृतज्ञता...

जब कल्याण नीति और प्रतीकवाद आमने-सामने हों...

When Welfare Meets Symbolism: The Debate Over Renaming a National Employment Programme

Terrorism Has No Religion... (English)

Terrorism Has No Religion...

टी20 टीम में बदलाव का समय: क्यों रिंकू सिंह, संजू सैमसन और मोहम्मद शमी को वापस बुलाना जरूरी है

Time for a Shake-Up: Why Rinku Singh, Sanju Samson, and Mohammed Shami Deserve a Recall to India’s T20 Team