लड़की की किस्मत(Pain of a woman)
लड़की की किस्मत काम ज़्यादा ही करती हूँ, ससुराल में, मायके से कहीं ज़्यादा। फिर भी न जाने क्यों किसी के चेहरे पर मेरे लिए संतोष नहीं दिखता। सुबह की पहली किरण से पहले उठती हूँ, रात की आख़िरी थकान तक चलती हूँ। अपने सपनों को चुपचाप समेटकर, सबकी ख़ुशियों में ही पलती हूँ। हर रिश्ते को अपना मानती हूँ, हर फ़र्ज़ दिल से निभाती हूँ। अपनी इच्छाओं को पीछे रखकर, सबकी उम्मीदों को सजाती हूँ। फिर भी अक्सर यही सुनने को मिलता है— "अभी और करना चाहिए था..." कोई ये नहीं पूछता, कि मेरे थके हुए मन ने आज कितना दर्द सहा था। कैसी है ये लड़की की किस्मत, जो हर घर को अपना घर कहती है, पर कई बार उम्र बीत जाती है, और वह ख़ुद ही "अपनी" कहलाने को तरसती है। वह माँ-बाप का आँगन छोड़ती है, एक नए संसार को अपनाती है। हर रिश्ता दिल से निभाती है, फिर भी अपनेपन की तलाश में अक्सर ख़ुद ही खो जाती है। लेकिन ऐ लड़की, तू कमज़ोर नहीं, तू शक्ति है। तेरे धैर्य में पर्वतों-सी दृढ़ता है, तेरे प्रेम में सागर-सी गहराई है। एक दिन तेरी निस्वार्थ मुस्कान, तेरे त्याग और तेरे समर्पण का मूल्य ज़रूर पहचाना जाएगा। क्योंकि जो प...