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अब यह न कहना कि मैं तुम्हें प्यार करना सिखाऊँ...

 अब यह न कहना कि मैं तुम्हें प्यार करना सिखाऊँ, अब यह न कहना कि तुम्हें साँस लेना सिखाऊँ। यदि तुमने खुद को जीते-जी मार दिया है, तो बात अलग है, पर जो कहे कि उसे प्रेम समझ नहीं आता— मैं इतना ही कहूँगा, तुमने ज़िंदगी से हार मान ली है। तुम डर गए हो, तुम्हारा समाज तुम पर भारी हो गया है, तुम्हारे परिवार ने तुम्हारी सोच को दबा दिया है। प्रेम केवल शब्द नहीं, प्रेम व्यवहार है, प्रेम आचार और विचार है।(रूपेश रंजन)  प्रेम समर्पण है, प्रेम एक दिव्यता है, सिर्फ़ एक आलिंगन नहीं— वह आत्मा का विस्तार है, वह जीवन का सार है।(रूपेश रंजन) 

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Love Gandhiji, and your problems will be solved....

“अगर हम गाँधीजी के मार्ग पर चलते, तो आज दुनिया ऐसी नहीं होती”