भारत में भगदड़ की कहानी
भारत में भगदड़ की कहानी जब आस्था, आशा और उत्सव त्रासदी में बदल जाते हैं लेखक: रुपेश रंजन प्रस्तावना: एक ऐसा देश जहाँ उत्सव भी हैं और मातम भी भारत उत्सवों, आस्थाओं, परंपराओं और सामूहिक उल्लास का देश है। यहाँ करोड़ों लोग मंदिरों में दर्शन करने, धार्मिक मेलों में भाग लेने, त्योहार मनाने, राजनीतिक सभाओं में शामिल होने, खेल प्रतियोगिताएँ देखने और अपने प्रियजनों के साथ आनंद के क्षण साझा करने के लिए एकत्रित होते हैं। ये जनसमूह भारतीय समाज की सांस्कृतिक विविधता, सामूहिक चेतना और जीवंत परंपराओं का प्रतीक हैं। लेकिन समय-समय पर ऐसे ही उत्सवों के बीच एक भयावह दृश्य सामने आता है। मंदिर में दर्शन करने निकला परिवार अपनों को खो देता है। धार्मिक मेले में आस्था के साथ पहुँचे लोग कभी न लौटने वाली यात्रा पर चले जाते हैं। रेलवे स्टेशन पर अपने गंतव्य तक पहुँचने की प्रतीक्षा कर रहे यात्रियों के लिए कुछ क्षणों का अव्यवस्थित जमावड़ा जीवन की सबसे बड़ी त्रासदी बन जाता है। जहाँ हँसी, प्रार्थना और उत्साह होना चाहिए, वहाँ चीखें, आँसू, बिखरे हुए जूते-चप्पल और अपनों को खोजती हुई आँखें दिखाई देने लगती हैं। भारत में भग...