जब एक राष्ट्र अपने योद्धाओं को भूलने लगता है: Mohammed Shami के प्रति व्यवहार पर एक पीड़ादायक प्रश्न
जब एक राष्ट्र अपने योद्धाओं को भूलने लगता है: Mohammed Shami के प्रति व्यवहार पर एक पीड़ादायक प्रश्न भारत में क्रिकेट केवल खेल नहीं है। यह भावना है, स्मृति है, गर्व है और करोड़ों लोगों की सामूहिक चेतना का हिस्सा है। हर पीढ़ी अपने क्रिकेट नायकों को केवल आँकड़ों से नहीं, बल्कि उन क्षणों से याद रखती है जब किसी खिलाड़ी ने दबाव, भय और हार के बीच खड़े होकर पूरे देश को उम्मीद दी थी। ऐसे ही योद्धाओं में एक नाम है — Mohammed Shami। एक ऐसा गेंदबाज जिसने भारतीय तेज गेंदबाजी की पहचान बदलने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। एक ऐसा खिलाड़ी जिसने वर्षों तक अपने शरीर, मानसिक दबाव और आलोचनाओं से लड़ते हुए देश के लिए प्रदर्शन किया। लेकिन आज कई क्रिकेट प्रेमियों को यह महसूस होने लगा है कि भारतीय क्रिकेट ने अपने सबसे महान तेज गेंदबाजों में से एक के सम्मान के साथ न्याय नहीं किया। और यही भावना दर्द देती है। यह केवल चयन का प्रश्न नहीं है। यह सम्मान, गरिमा और स्मृति का प्रश्न है। भारतीय तेज गेंदबाजी क्रांति का मौन स्तंभ लंबे समय तक भारतीय क्रिकेट की पहचान स्पिन गेंदबाजी रही। विदेशी धरती पर तेज गेंदबाजों की कमी अक्सर...