भ्रष्टाचार के प्रति शून्य सहनशीलता: विकसित भारत की अनिवार्य राह
भ्रष्टाचार के प्रति शून्य सहनशीलता: विकसित भारत की अनिवार्य राह भारत आज अपने इतिहास के एक ऐसे महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है, जहाँ उसके सामने केवल आर्थिक विकास का लक्ष्य नहीं, बल्कि एक ऐसे राष्ट्र के निर्माण का अवसर है जो समृद्ध होने के साथ-साथ संस्थागत रूप से मजबूत, प्रशासनिक रूप से पारदर्शी, सामाजिक रूप से न्यायपूर्ण और नैतिक रूप से विश्वसनीय हो। भारत के पास विशाल जनसंख्या, युवा कार्यबल, तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, तकनीकी क्षमता, उद्यमशीलता, वैज्ञानिक प्रतिभा, डिजिटल अवसंरचना और वैश्विक स्तर पर बढ़ता प्रभाव है। विकसित राष्ट्र बनने की उसकी आकांक्षा इसलिए केवल कल्पना नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक संभावना है। लेकिन विकसित राष्ट्र बनने का अर्थ केवल अधिक GDP, ऊँची इमारतें, चौड़ी सड़कें, आधुनिक हवाई अड्डे, तेज इंटरनेट, बड़े उद्योग और अत्याधुनिक तकनीक नहीं है। विकास की वास्तविक गुणवत्ता इस बात से भी निर्धारित होती है कि किसी देश की संस्थाएँ कितनी ईमानदार हैं, प्रशासन कितना जवाबदेह है, कानून कितना निष्पक्ष है, सार्वजनिक धन का उपयोग कितना प्रभावी है और नागरिकों को अपनी व्यवस्था पर कितना विश्व...