गांधी: एक व्यक्ति में अनेक विचारधाराओं का अद्भुत संगम
गांधी: एक व्यक्ति में अनेक विचारधाराओं का अद्भुत संगम कम्युनिज़्म, समाजवाद, पूँजीवाद, परोपकार, समाज सुधार, धर्म, नास्तिकता, अराजकतावाद और व्यवस्था के बीच महात्मा गांधी की वैचारिक सुंदरता लेखक: रुपेश रंजन प्रस्तावना: गांधी होने की सुंदरता कुछ व्यक्तित्व किसी एक विचारधारा के प्रतिनिधि होते हैं, जबकि कुछ व्यक्तित्व विचारधाराओं की सीमाओं से आगे निकलकर स्वयं में एक व्यापक वैचारिक संसार बन जाते हैं। महात्मा गांधी ऐसे ही व्यक्तित्व थे। वे केवल स्वतंत्रता सेनानी, राजनीतिक नेता या समाज सुधारक नहीं थे, बल्कि मानवता की संभावनाओं को समझने का एक जीवंत प्रयोग थे। गांधी को जब हम अलग-अलग दृष्टिकोणों से देखते हैं, तो उनके व्यक्तित्व में अनेक विचारधाराओं की झलक दिखाई देती है। वे साम्यवाद की तरह आर्थिक शोषण के विरोधी थे, समाजवाद की तरह सामाजिक कल्याण के समर्थक थे, पूँजीवाद की तरह व्यक्तिगत पहल और संपत्ति के अस्तित्व को पूरी तरह नकारते नहीं थे, परोपकारी की तरह मानव सेवा में विश्वास करते थे, समाज सुधारक की तरह रूढ़ियों को चुनौती देते थे, धार्मिक व्यक्ति की तरह ईश्वर और प्रार्थना में आस्था रखते थ...