हम तो रंग दें पन्नों को अपनी ख़ून की स्याही से...
हम तो रंग दें पन्नों को अपनी ख़ून की स्याही से... मसला यह है कि उसे पढ़ेगा कौन... हम तो सब कह दें... मसला है कि सुनेगा कौन... जलता है यह दिल पल-पल... मसला है कि आग बुझाएगा कौन... दर्द बहुत होता है साहब... मसला है कि दवा देगा कौन... आप कहें तो मर भी जाएँ... मसला है कि मेरे मरने पर रोएगा कौन... रूपेश रंजन