समाज गांधीजी के मूल्यों को कितने समय में आत्मसात करेगा?
समाज गांधीजी के मूल्यों को कितने समय में आत्मसात करेगा? क्या गांधी के विचार भी बौद्ध और जैन मूल्यों की तरह सभ्यता का हिस्सा बन सकते हैं? महात्मा गांधी के बारे में एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि आखिर मानव समाज को गांधीजी के मूल्यों को वास्तव में आत्मसात करने में कितना समय लगेगा? क्या गांधीजी के विचार भी आने वाली सदियों में उसी प्रकार भारतीय सभ्यता की नैतिक चेतना का हिस्सा बन सकते हैं, जैसे बौद्ध और जैन परंपराओं से जुड़े करुणा, अहिंसा, संयम, आत्मानुशासन और जीवों के प्रति सम्मान जैसे विचार भारतीय समाज की दीर्घकालीन चेतना में समाहित हुए हैं? यह प्रश्न केवल गांधीजी की लोकप्रियता का प्रश्न नहीं है। यह सभ्यता के विकास का प्रश्न है। किसी व्यक्ति का प्रसिद्ध हो जाना बहुत आसान है। कोई राजनीतिक नेता कुछ वर्षों में राष्ट्रीय प्रतीक बन सकता है। लेकिन किसी दर्शन का समाज की गहरी चेतना में उतरना एक बहुत लंबी प्रक्रिया होती है। विचारों को पुस्तकों से निकलकर व्यवहार में आना पड़ता है। व्यवहार को आदत बनना पड़ता है। आदतों को संस्कृति बनना पड़ता है। और संस्कृति को पीढ़ियों के माध्यम से...