छन छन छन छन पायल बोली...
छन छन छन छन पायल बोली, रात ने चुपके चाँदनी खोली, जब तुम धीरे से मुस्काई थीं, सारी दिशाएँ महक आई थीं। तुम्हारे आने से जैसे मौसम को भाषा मिल जाती है, सूखे हुए मन के उपवन में फिर से हरियाली छा जाती है। तुम्हारी आँखें— मानो शांत झील पर ठहरी हुई सांझ, जहाँ कोई चाँद अपना प्रतिबिंब खोजता हो। मैं जब उनमें देखता हूँ, तो स्वयं को भूल जाता हूँ, और केवल तुम्हारा हो जाता हूँ। तुम्हारे अधरों की वह हल्की मुस्कान, मानो गुलाब की पंखुड़ियों पर ओस की पहली बूँद उतर आई हो। तुम्हारी हँसी में एक ऐसा संगीत है जो किसी वीणा से नहीं, सीधे आत्मा से निकलता है। जब तुम अपने केशों को धीरे से कानों के पीछे करती हो, समय ठहर जाता है। हवा भी तुम्हें देखने लगती है, और चाँद अपनी चाँदनी कम कर देता है, क्योंकि तुम्हारे चेहरे की आभा के सामने उसका प्रकाश भी फीका लगता है। तुम्हारी चाल में किसी नदी की मधुर लय है, और तुम्हारे स्पर्श में एक ऐसा अपनापन जो टूटे हुए मन को भी फिर से जीना सिखा दे। तुम्हारे साथ बिताया हर क्षण मेरे जीवन का सबसे सुंदर श्लोक है। तुम्हारी उँगलियों का स्पर्श जब मेरी हथेलियों से मिलता है, तो लगता है जैसे सृष्...