तिरंगे का अर्थ
तिरंगे का अर्थ तिरंगा केवल रंग नहीं, यह भारत की शाश्वत पहचान है। यह उन असंख्य बलिदानों की अग्नि है, जिसने हर पीढ़ी को स्वाभिमान दिया है। केसरिया कहता है— जलना सीखो, पर झुकना नहीं; अपने से पहले राष्ट्र को रखो, और सत्य के लिए रुकना नहीं। श्वेत सिखाता है— शक्ति का मार्ग शांति से होकर जाता है; जिस विजय में करुणा न हो, वह इतिहास में नहीं ठहर पाता है। हरा रंग फुसफुसाता है— धरती की हर साँस तुम्हारी धरोहर है; विकास तभी सार्थक होगा, जब प्रकृति भी तुम्हारे साथ मुस्कुराएगी। बीच का अशोक चक्र कहता है— रुको मत, थको मत, समय के साथ चलो, पर अपने मूल्यों को कभी छोड़ो मत। जब यह नभ में लहराता है, सीमाएँ केवल नक्शों पर नहीं रहतीं; हर भारतीय के हृदय में एक अदृश्य प्रतिज्ञा बनकर बस जाती हैं। यह सैनिक की अंतिम मुस्कान है, किसान के पसीने की चमक है; वैज्ञानिक के स्वप्नों का आकाश है, मज़दूर के श्रम की दमक है। विद्यालयों की प्रार्थना में, मंदिरों की घंटियों में, मस्जिदों की अज़ानों में, गुरुद्वारों की वाणियों में— तिरंगा किसी धर्म का नहीं, पूरे भारत के विश्वास का नाम है। ज...