भारत का असली रास्ता: विभाजन से आगे बढ़कर साझा विकास की ओर
भारत का असली रास्ता: विभाजन से आगे बढ़कर साझा विकास की ओर Rupesh Ranjan भारत आज इतिहास के ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहाँ उसकी क्षमता किसी से छिपी नहीं है। युवा जनसंख्या, तेज़ी से बढ़ती तकनीक, वैश्विक प्रभाव और सांस्कृतिक विविधता—ये सब मिलकर भारत को एक महान शक्ति बनाने की क्षमता रखते हैं। लेकिन इसके साथ एक महत्वपूर्ण सवाल भी जुड़ा है: आखिर हमें रोक क्या रहा है? समस्या संसाधनों या प्रतिभा की कमी नहीं है। असली बाधा समाज में गहराई से जमी हुई विभाजनकारी सोच है—जातिवाद, धार्मिक तनाव और लैंगिक असमानता—जो देश की प्रगति को टुकड़ों में बांट देती है। प्रगति विभाजन पर नहीं, एकता पर बनती है कोई भी देश तब तक तेज़ी से आगे नहीं बढ़ सकता जब तक उसके लोग आपस में बंटे हुए हों। जब अवसर जाति के आधार पर तय हों, जब धर्म के नाम पर अविश्वास बढ़े, या जब महिलाओं को समान अधिकार और सुरक्षा न मिले—तो विकास असंतुलित और कमजोर हो जाता है। एक मजबूत राष्ट्र वही होता है जहाँ लोग खुद को पहले नागरिक समझें, किसी जाति या समूह का हिस्सा नहीं। सामाजिक दीवारों की कीमत ये समस्याएँ सिर्फ विचार नहीं हैं, इनके वास्तविक परिणाम हैं: एक प्रत...