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कर ही क्या सकते हैं...

कर ही क्या सकते हैं, एक मिट जाने के सिवा। क्या ही पाऊँगा, माँ, तेरे बिना। यदि मेरी साँसें तेरे काम न आ सकीं, तो मेरे होने का क्या ही अर्थ रहा। मातृभूमि, तेरी आन, तेरी शान, तेरी मिट्टी के लिए जो भी करना पड़े—कम है। तेरी गोद में जीना सौभाग्य है, और तेरी रक्षा में मिट जाना जीवन का सबसे बड़ा सम्मान।

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