मिट्टी के लिए ही सब कुछ है...

 

मिट्टी के लिए ही सब कुछ है

मिट्टी के लिए ही जीते हैं,
मिट्टी के लिए मरते हैं।
इस पावन धरती मां की खातिर,
हर संकट से लड़ते हैं।

मिट्टी दे दे, सब ले ले,
पर आत्मा मेरी ना झुके।
गर बचा न पाए इसे,
तो जीने का क्या सुख मिले?

मरना बेहतर मिट्टी में,
पर गैरों की जमीं न हो।
अपनी धरती छोड़कर,
परछाईं भी अधूरी हो।

जो मिट्टी से जन्मा है,
वो मिट्टी में मिल जाएगा।
पर जब तक सांसें बाकी हैं,
इसे ना कोई छू पाएगा।

जय भारत! जय मिट्टी!

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