कला का उद्देश्य ...

मेरे मन ने जीवन में अनेक अनुभव अर्जित किए हैं —
कुछ शानदार अनुभव भी।

कुछ किताबें पढ़कर,
कभी कविता, कभी चाँद को निहारकर,
कभी संगीत सुनकर,
या किसी चित्र को देखकर।
यदि वही अनुभव फिर से जीवंत हो उठते हैं,
और उस स्वर्गिक एहसास की अनुभूति होती है —
तो समझ लेना,
कला का उद्देश्य पूर्ण हो गया।

— रुपेश रंजन



मेरे शब्दों से तुम्हें कुछ महसूस होता हो,
मेरे शब्दों से तुम्हें कुछ याद आता हो —
वो शानदार अनुभव,
कोई तिलिस्म, कोई जादू,
या स्वर्गिक सुख की कोई झलक —

तो समझ लेना,
मैं सफल हुआ।

— रुपेश रंजन

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