"प्रेम ही साधु की सिद्धि है"

"प्रेम ही साधु की सिद्धि है"

तू साधु है,
तू सब कुछ कर सकता है,
सब कुछ — मतलब सब कुछ,
बस प्रेम कर,
बहुत सारा,
निर्बाध, निरंतर, निरपेक्ष।

तू ईश्वर से प्रेम कर,
असीमित प्रेम,
जहाँ कोई प्रश्न न हो,
न कोई शर्त, न कोई भय।

हर विधा में
तू सर्वश्रेष्ठ बन सकता है,
यदि प्रेम तेरी प्रेरणा हो,
और करुणा तेरा आधार।

तू चाहे तो शून्य से ब्रह्म बना सकता है,
तू चाहे तो क्रंदन को गान बना सकता है,
बस ह्रदय को खोल,
प्रेम बहने दे — जैसे गंगा की धारा।

तू साधु है,
तू जग को आलोकित कर सकता है,
प्रेम से ही तू
अधूरे को पूरा कर सकता है।

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