सब कुछ बदल गया, सब कुछ संभालना सीख लिया।

सब कुछ बदल गया,
सब कुछ संभालना सीख लिया।
मुश्किल से मुश्किल परिस्थिति में भी
खुद को टूटने नहीं दिया।

हालातों ने रंग बदले,
रिश्तों ने रूप,
पर एक चीज़ अब भी वैसी ही रही —
मेरा चरित्र, मेरा स्वरूप।

मैं वैसा ही रहा जैसा था,
ना ज़िंदगी बदल सकी,
ना जमाना,
चाहा बहुत खुद को बदलना,
पर ना कर सका ये फसाना।

सच कहूं —
हर लम्हा नया सीखा,
पर खुद को खोने से हमेशा रोका।
संघर्ष बदले, रास्ते बदले,
पर मेरी आत्मा का दर्पण
अब भी वैसा ही चमका।

रूपेश रंजन

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