बिना बताए चली गई...

बिना बताए चली गई,
इतनी भी क्या खता थी मेरी?
जो दर्द दिया तूने, वो सज़ा नहीं, साजिश थी तेरी।
इतना बड़ा बदला लिया मुझसे,
खुद को सौंप दिया दूसरे की बाहों में,
और कह गई— मोहब्बत तो कभी की ही नहीं थी तूने





क्यों चले गए छोड़ के,
क्या इतनी सी बात बुरी लगी?
अपनों को यूँ कौन छोड़ता है,
थोड़ा सा समझ लेते, क्या कमी थी मेरी?
जाने वाले तो बहाने ढूंढ़ लेते हैं,
रह जाने वाले उम्र भर सवाल करते हैं।

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