"बस माँ चाहिए"

"बस माँ चाहिए"

✍🏻 रूपेश रंजन

मुझे कुछ नहीं चाहिए,
तुम सब ले लो —
सपने, सुख, सम्मान,
सब कुछ त्याग सकता हूँ,

बस माँ चाहिए।

ये वंदन, ये समर्पण,
सब माँ के लिए है,
हर श्वास, हर स्पंदन,
माँ के चरणों में अर्पण है।

ये जीवन माँ के लिए है,
माँ की कृपा से ही पाया है,
इस संसार में आने के बाद
माँ का आशीष पाना
ही मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि है।

इसके शेष,
मुझे कुछ नहीं पाना…

माँ की एक झलक मिले —
तो सब पूर्ण है।
माँ की मौन छाया मिले —
तो सब शांत है।

न वाणी चाहिए,
न कोई वरदान,
न राज, न सम्मान —
अगर माँ मिल जाए,
तो सारा संसार मिल गया।



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