अगर मुझे मार देने से सब कुछ समाप्त हो जाएगा



अगर मुझे मार देने से सब कुछ समाप्त हो जाएगा,
तो मार दो मुझे।
लेकिन याद रखो—
वह तो तुम्हारे भीतर भी पल रहा है।

हम दोनों इतने भिन्न नहीं हैं,
वह शक्ति तुम्हारे भीतर भी जगेगी ही।
एक दिन वह फिर बाहर आएगी,
जिसे तुम शायद अब न मिटा पाओगे।

और यदि तुम उसे फिर मिटा भी दोगे,
तो कुछ समय बाद वह फिर लौट आएगी।
यह सब जो यहाँ है,
जिससे तुम घृणा करते हो,
और जिसकी वजह से मुझसे घृणा करते हो—
यह सब यहीं का है,
हमारा ही रचा हुआ है।

मेरा धर्म,
मेरे विचार,
मेरा अस्तित्व—
सब यहीं तैयार हुए हैं,
जैसे तुम।

इसलिए न मेरे जाने से कुछ समाप्त होगा,
न तुम्हारे रहने से कुछ नया होगा।
सब कुछ वैसा ही रहेगा,
सिर्फ़ अलग-अलग रूपों में।


रुपेश रंजन

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