मुझे बड़ा नहीं बनना...

मुझे बड़ा नहीं बनना,
मुझे बस साधारण रहना है।
बिलकुल साधारण—
एक आम आदमी की तरह,
जिसकी कोई अलग पहचान न हो।

भीड़ में घुला हुआ एक चेहरा,
जिसे कोई नाम से न पुकारे,
कोई पहचान न माँगे।

मुझे दुर्गा पूजा के मेले में घूमना है—
अपनी गाड़ी में नहीं,
बल्कि पैदल,
उस भीड़ के बीच,
एक सामान्य इंसान की तरह।

मैं अपना जीवन यूँ ही जीना चाहता हूँ—
सीधा, सादा,
बिना दिखावे,
बस एक सहज मुस्कान के साथ।

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