अब बस बहुत हुआ: गिल और सूर्या को लगातार नाकामियों के बाद टीम से बाहर करने का समय आ गया है...
अब बस बहुत हुआ: गिल और सूर्या को लगातार नाकामियों के बाद टीम से बाहर करने का समय आ गया है।
भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच दूसरे टी20 मैच ने फिर एक पुरानी बहस को हवा दे दी है — आखिर कब तक बड़े नाम फेल होते रहेंगे और टीम फिर भी उन्हें मौका देती रहेगी?
एक बार फिर शुभमन गिल जल्दी आउट हुए, एक बार फिर सूर्यकुमार यादव टिक नहीं पाए, और एक बार फिर भारत की शुरुआत मैच की शुरुआत में ही ढह गई।
फैंस की नाराज़गी वाजिब है, क्योंकि यह अब एक दिन की कहानी नहीं, बल्कि एक लगातार दोहराई जाने वाली समस्या बन चुकी है।
मुद्दा एक-दो बार फेल होने का नहीं, लगातार फेल होने का है
टी20 क्रिकेट का पूरा खेल तेज़ शुरुआत, स्थिरता और निरंतरता पर टिका होता है।
अगर हर मैच में शीर्ष क्रम दो-तीन ओवर में ही टूट जाए, तो टीम जीत की उम्मीद नहीं लगा सकती।
बीते कई महीनों से:
गिल शुरुआत में ही आउट हो जाते हैं,
सूर्या छोटी-छोटी पारियां खेलकर वापस लौट आते हैं,
और टीम के बाकी बल्लेबाज़ दबाव में खेलते हुए गलत शॉट खेल देते हैं।
ये बार-बार की असफलताएँ टीम के संतुलन को बिगाड़ रही हैं और ऐसी स्थितियाँ बना रही हैं जहाँ मैच हाथ से निकलना तय हो जाता है।
प्रतिभा अपनी जगह है, लेकिन जगह प्रदर्शन से ही बनती है
हर खिलाड़ी की एक प्रतिष्ठा होती है, लेकिन प्रतिष्ठा तब तक ही चलती है जब तक रन आते रहें।
अगर लंबे समय तक रन न आएँ, तो चाहे खिलाड़ी कितना भी बड़ा क्यों न हो, सवाल उठना लाज़मी है।
फैंस भी यही पूछ रहे हैं:
क्या केवल कुछ नामों को बचाने के लिए टीम को मैच गंवाने चाहिए?
क्या नए खिलाड़ियों को मौका नहीं मिलना चाहिए, जो लगातार घरेलू क्रिकेट में अच्छा कर रहे हैं?
भारत के पास ऐसे कई युवा खिलाड़ी हैं जो मौका मिलने का इंतज़ार कर रहे हैं, लेकिन टीम बार-बार उन्हीं चेहरों को लाती है, जिनका फॉर्म लगातार गिर रहा है।
टी20 में आज के समय की सोच अलग है — और भारत को वही अपनानी होगी
दुनिया की टी20 टीमें लगातार आक्रामक खेल रही हैं, नई रणनीतियाँ बना रही हैं और युवाओं को बेखौफ मौके दे रही हैं।
भारत भी अगर वर्ल्ड कप जैसे बड़े टूर्नामेंट जीतना चाहता है, तो उसे:
विश्वसनीय ओपनर्स,
एक स्थिर नंबर 3,
और दबाव में शांत रहने वाले मिडल-ऑर्डर बल्लेबाज़
की आवश्यकता है।
अगर अनुभवी खिलाड़ी सहयोग नहीं कर पा रहे हैं, तो चयनकर्ताओं को साफ संदेश देना चाहिए —
टीम में जगह प्रदर्शन से मिलेगी, नाम से नहीं।
यह आलोचना खिलाड़ी को नीचा दिखाने के लिए नहीं, बल्कि जिम्मेदारी तय करने के लिए है
शुभमन गिल की प्रतिभा पर कोई सवाल नहीं।
सूर्या टी20 के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज़ों में से एक रहे हैं।
लेकिन कोई भी खिलाड़ी बड़ा नहीं होता कि उसे सवालों से ऊपर रखा जाए।
अगर फॉर्म खराब है, तो उसे ठीक करने के लिए बाहर बैठना भी एक समाधान है — इससे न खिलाड़ी टूटता है और न टीम।
नए खिलाड़ी भूखे होते हैं, चुनौती स्वीकार करने को तैयार होते हैं, और टीम में नई ऊर्जा लाते हैं।
अब टीम मैनेजमेंट को मुश्किल निर्णय लेने होंगे
भारत को आगे बढ़ने के लिए:
चयन फॉर्म के आधार पर करना होगा,
बड़े नामों के लिए अलग नियम नहीं चलेंगे,
युवाओं को लगातार अवसर दिए जाएंगे,
और हर खिलाड़ी को प्रदर्शन की जिम्मेदारी लेनी होगी।
इस समय गिल और सूर्या के लिए सबसे स्पष्ट संदेश यही होना चाहिए:
या तो लगातार रन बनाओ, नहीं तो अपनी जगह किसी और को देने के लिए तैयार रहो।
निष्कर्ष
टी20 क्रिकेट तेज़ी, साहस और निरंतर प्रदर्शन का खेल है।
अगर भारत पुराने ढर्रे पर ही चलता रहा, तो दुनिया उससे आगे निकल जाएगी।
इसलिए बदलाव जरूरी है —
टीम के लिए, आने वाले टूर्नामेंट्स के लिए, और भारतीय क्रिकेट के भविष्य के लिए।
कभी-कभी सबसे कठिन फैसले ही टीम को सबसे मजबूत बनाते हैं।
शायद यह उन्हीं फैसलों का समय है।
Comments
Post a Comment