वर्षांत की कृतज्ञता...

वर्षांत की कृतज्ञता

जब वर्ष की साँझ
धीरे-धीरे स्मृतियों में ढलती है,
तो कुछ नाम
दिल की दीवारों पर
चुपचाप उजास बन जाते हैं।

उन हाथों का आभार
जिन्होंने थकान में मुझे थामा,
उन बाँहों को नमन
जिन्होंने बिना सवाल
मुझे गले लगाया।

उन शब्दों को प्रणाम
जो कठोर समय में भी
कोमल बने रहे,
उन मुस्कानों को धन्यवाद
जिन्होंने अँधेरे दिनों में
रोशनी का भरोसा दिया।

जो मेरे रहस्य बनकर
मेरी आत्मा के प्रहरी रहे,
जो बिना स्वार्थ
सिर्फ़ सुना करते थे—
आज उनका होना
सबसे बड़ा उपहार है।

यदि इस वर्ष ने
मुझे कुछ सिखाया है,
तो यही कि
साथ चलने वाले लोग
ईश्वर की सबसे सुंदर
कृपा होते हैं।

इस वर्ष के अंत में
मैं सिर झुकाकर कहता हूँ—
तुम सब का होना
मेरे जीवन की
सबसे शांत
और सबसे सच्ची
समृद्धि है। ❤️

 

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