मुक्ति आवश्यक है...
मुक्ति आवश्यक है
मुक्ति आवश्यक है—
पर मेरी मुक्ति
किसी की हत्या से नहीं जन्म लेगी।
मैं रक्त नहीं बहाऊँगा
किसी और को मुक्त करने के नाम पर।
मैं माध्यम नहीं बनूँगा
हिंसा की विरासत का,
न ही तलवार उठाकर
अपने विवेक को गिरवी रखूँगा।
मेरा वीरत्व
आघात में नहीं,
आत्म-संयम में है।
मेरी शक्ति
किसी को तोड़ने में नहीं,
स्वयं को बचाने में है।
यदि कोई व्यक्ति
मेरी चेतना को जकड़ता है,
मेरे विचारों पर
अधिकार जमाना चाहता है—
तो मैं युद्ध नहीं करूँगा,
मैं दूरी चुनूँगा।
क्योंकि
अलग हो जाना भी साहस है,
और मौन में खड़ा रहना भी
एक प्रकार का रण है।
मैं स्वयं को
उन हाथों से छुड़ा लूँगा
जो प्रेम के नाम पर
बंधक बनाते हैं।
मैं स्वयं को
उन आँखों से दूर कर लूँगा
जो भय बोती हैं।
मुक्ति आवश्यक है—
और मेरी मुक्ति
अलगाव में है,
आत्म-सम्मान में है,
अपने पथ पर
निर्भय चलने में है।
मैं न मारूँगा,
न झुकूँगा,
न समझौता करूँगा
अपने अस्तित्व से।
मैं खड़ा रहूँगा
शांत, अडिग,
और जब आवश्यक होगा—
मैं स्वयं को
उस भीड़ से अलग कर लूँगा।
मुक्ति आवश्यक है—
और मैं माध्यम नहीं बनूँगा,
मैं स्वयं मुक्त हो जाऊँगा।
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