अविचल प्रेम

अविचल प्रेम
— रूपेश रंजन

ना कभी तुमसे मन भरेगा,
ना तुम्हारे लिए प्रेम कम होगा,
समय चाहे कितनी ही दूरियाँ
हमारे बीच क्यों न बुन दे।

तुम्हारे साथ बिताया हुआ
हर एक क्षण
मेरे हृदय के कोष में
रत्न की भाँति सुरक्षित है।

वो हँसी के छोटे-छोटे पल,
वो मौन में छिपे संवाद,
वो राहें जिन पर साथ चले थे
आज भी स्मृतियों में उजाले से भरे हैं।

जीवन की इस लंबी यात्रा में
बहुत लोग मिलेंगे,
बहुत चेहरे आएँगे और चले जाएँगे,
पर कुछ संबंध
समय से परे हो जाते हैं।

तुम्हारा साथ
मेरे लिए वही दुर्लभ सौभाग्य है
जो हर किसी को
नसीब नहीं होता।

इसलिए यदि कभी
दूरियाँ भी आ जाएँ
तो यह समझ लेना—
प्रेम की ज्योति
अब भी मेरे भीतर जलती है।

क्योंकि तुम्हारे साथ गुज़रा
हर एक क्षण
मेरे जीवन की पुस्तक का
सबसे अनमोल अध्याय है।

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