वर्षों बाद भी

वर्षों बाद भी
— रूपेश रंजन

यदि वर्षों बाद
किसी अनजानी राह पर
अचानक तुम मिल जाओ,
तो शायद शब्द
पहले जैसे सहज न हों।

समय की धूल
बहुत कुछ ढक देती है,
पर हृदय के कुछ कोने
ऐसे होते हैं
जहाँ स्मृतियाँ अब भी उजली रहती हैं।

मैं तुम्हें देखूँगा
जैसे कोई पुराना गीत
अचानक हवा में
फिर से गूँज उठा हो।

तुम्हारी आँखों में
वही प्रश्न होंगे शायद,
और मेरी आँखों में
वही उत्तर
जो कभी कहे नहीं गए।

मैं मुस्कुराकर बस इतना कहूँगा—
कि समय बदल सकता है
राहें बदल सकती हैं,
पर कुछ भाव
काल के आगे झुकते नहीं।
वर्षों की दूरियाँ भी
उनके स्वर को मंद नहीं कर पातीं।

इसलिए यदि उस दिन
हम फिर से मिलें,
तो यह जान लेना—
मेरे मन के आकाश में
तुम्हारी स्मृति का दीप
अब भी शांत लौ में जल रहा है।

और मैं आज भी
उसी सरल सत्य को
धीमे से दोहराऊँगा—
कि प्रेम
समय की सीमाओं से परे
अपनी शाश्वत राह
खुद बना लेता है।

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