जाना वहीं तक है...

जाना वहीं तक है, 
जहाँ तुम मिलो,
रास्तों का मोल भी वहीं तक है।
वरना ये शहर, ये मंज़िलें, ये सफ़र
सब बस एक अधूरी कहानी से लगते हैं।

तुम्हारे बिना ये शामें भी
कुछ जल्दी ढल जाती हैं,
और रातें चुपचाप
यादों की चादर ओढ़ लेती हैं।

कभी सोचा नहीं था
कि किसी की मुस्कान
इतनी गहरी जगह बना लेगी
दिल की ख़ामोश गलियों में।

पर अब हाल ऐसा है
कि हर रास्ता तुम्हारी ओर मुड़ता है,
हर ख्वाब की शुरुआत
तुम्हारे नाम से होती है।

अगर सफ़र लंबा भी हो
तो कोई शिकायत नहीं,
बस इतना यक़ीन रहे—
आख़िर में तुम मिलोगे।

क्योंकि मेरे लिए
मंज़िल का मतलब कोई जगह नहीं,
एक एहसास है…
जहाँ तुम हो, वही मेरी दुनिया है।

इसलिए जाना वहीं तक है
जहाँ तुम मिलो,
क्योंकि तुम्हारे बिना
हर दूरी अधूरी है।

रूपेश रंजन

Comments

Popular Posts