मिलन का क्षण
मिलन का क्षण
— रूपेश रंजन
जब भी तुम मुझसे
गले मिलने आओ,
क्षण भर ठहर जाना,
जैसे समय ने
अपनी चाल थाम ली हों।
मेरी आँखों में देखना
केवल देखने के लिए नहीं,
बल्कि उन अनकहे शब्दों को पढ़ने के लिए
जो वर्षों से
मौन की तहों में सोए हैं।
मेरा माथा चूमना
जैसे आकाश
धरती को आशीष देता है,
और मेरे हाथ को
थोड़ा कसकर थाम लेना
मानो भरोसा
स्पर्श बनकर उतर आया हो।
उस पल यह मत सोचना
कि संसार हमें देख रहा है,
दुनिया की दृष्टि
क्षणिक होती है,
पर प्रेम की अनुभूति
अनंत होती है।
तुम बस मुझे देखना,
और मैं तुम्हारे उस देखे जाने को
अपने हृदय में
एक उज्ज्वल दीप की तरह
संजो लेना चाहता हूँ।
क्योंकि मिलन के ऐसे क्षण
जीवन की लंबी यात्रा में
बहुत दुर्लभ होते हैं,
और जब वे आते हैं
तो समय भी
उनके आगे नतमस्तक हो जाता है।
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