तुम आना दशकों बाद मुझसे मिलने...

तुम आना दशकों बाद मुझसे मिलने,
समय की लंबी राहें पार करके।
मैं तुम्हें पहचान लूँगा
तुम्हारी उसी मुस्कान से
जो कभी मेरी दुनिया हुआ करती थी।

तब शायद हमारे बालों में
सफेदी की हल्की धूप उतर आई होगी,
चेहरे पर कुछ झुर्रियाँ होंगी,
और यादों की किताब
थोड़ी और मोटी हो चुकी होगी।

पर जब तुम सामने आओगी,
तो मैं बस एक ही बात कहूँगा—
कि समय ने बहुत कुछ बदला सही,
पर तुम्हारी आँखों की चमक
आज भी वैसी ही है।

मैं कहूँगा कि
सालों की दूरी,
मीलों की खामोशी
और अनगिनत मौसमों के बाद भी
तुम वैसी ही लगती हो
जैसी पहली बार दिखी थीं।

क्योंकि सुंदरता
केवल चेहरे में नहीं होती,
वह तो उन यादों में बसती है
जो दिल में चुपचाप घर बना लेती हैं|

और सच कहूँ तो
समय चाहे जितना भी बीत जाए,
कुछ लोग दिल में
हमेशा वैसे ही रहते हैं—
जैसे किसी पुराने गीत की धुन,
जो वर्षों बाद भी सुनो
तो वही सुकून दे जाती है।

— रूपेश रंजन

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