रात भर जागता रहा मैं

रात भर जागता रहा मैं
ख़ामोशी की उस लंबी राह पर,
जहाँ हर ख्याल
तेरे नाम की ओर मुड़ जाता है।

तारों से भरे आकाश के नीचे
मैंने कई सवालों से बात की,
पर कोई जवाब नहीं मिला
जो दिल को सुकून दे सके।

कभी लगा कि
तू मुझे याद कर रही होगी,
कभी लगा कि
ये बस मेरे दिल की आवाज़ है।

इन रातों की तन्हाई में
तेरी यादें धीमे से आती हैं,
जैसे कोई पुरानी धुन
अचानक कानों में गूंज उठे।

मैंने सोचा था
समय के साथ सब शांत हो जाएगा,
पर हर गुजरती रात
तेरी याद को और गहरा कर देती है।

शायद यही मोहब्बत है—
जहाँ दूरी भी पास लगती है,
और खामोशी में भी
किसी की आहट सुनाई देती है।

अब भी फैसला नहीं कर पाया हूँ
कि ये याद किसकी है,
तू मुझे याद कर रही है
या मैं ही तुझे याद कर रहा हूँ।

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