सुकून छीन लिया है मेरी रातों का
सुकून छीन लिया है मेरी रातों का
तेरी यादों ने चुपके से,
अब हर खामोशी में
तेरा ही नाम सुनाई देता है।
कभी लगता है
शिकायत करूँ इस दूरी से,
जो तुझे मुझसे
मीलों दूर ले गई है।
और कभी सोचता हूँ
गिला करूँ अपनी ही चाहत से,
जिसने तुझे इतना चाहा
कि अब हर पल तू ही याद आती है।
तेरी यादें भी अजीब हैं,
कभी मुस्कान बन जाती हैं,
तो कभी आँखों में
अनकही नमी छोड़ जाती हैं।
रात के सन्नाटे में
जब दुनिया सो जाती है,
तब दिल की गलियों में
तेरी आहट गूँजने लगती है।
मैंने कई बार चाहा
कि इन यादों को भुला दूँ,
पर सच यह है
कि इन्हीं में मेरा सुकून भी छुपा है।
शिकायत भी तुझसे है,
और मोहब्बत भी तुझसे,
क्योंकि तेरी दूरी ने ही
मेरे दिल की गहराई समझाई है।
शायद प्यार का मतलब यही है—
थोड़ी सी तड़प,
थोड़ी सी याद,
और बहुत सारा इंतज़ार।
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