तेरे नाम की खुशबू ...

तेरे नाम की खुशबू से महकती है मेरी हर सुबह,
तेरी यादों की चादर ओढ़कर सोती है हर शाम।
तू मिले तो जैसे रूह को मिल जाए सुकून,
तेरे बिना तो हर ख़ुशी लगती है अधूरी तमाम।

तेरी आँखों में जैसे कोई समंदर गहरा,
जिसमें डूबकर मैं खुद को पा लेता हूँ।
तेरी मुस्कान की रोशनी जब मुझ पर गिरती है,
तो अँधेरों में भी उजाला सा हो जाता हूँ।

तू है तो ये दुनिया भी रंगीन लगती है,
वरना हर मंज़र बस धुंधला सा लगता है।
तेरी बातों में जो मिठास है, मेरे हमदम,
वो किसी शायर की ग़ज़ल सा लगता है।

तेरे हाथों की लकीरों में अपना नाम खोजता हूँ,
तेरी धड़कनों में अपनी धुन सुनता हूँ।
तू पास हो तो वक्त ठहर सा जाता है,
और दूर हो तो हर पल सदी सा लगता है।

मेरी हर ख़्वाहिश का तू ही तो आसरा है,
मेरी हर दुआ में तेरा ही ज़िक्र रहता है।
मैं चाहता हूँ बस इतना ऐ मेरे महबूब,
तेरा साथ यूँ ही उम्र भर मेरे साथ रहता है।

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