तुम्हारी बाँहों में संसार...
1. तुम्हारी बाँहों में संसार
जब तुम मुझे
अपनी बाँहों में भरती हो,
तो लगता है
जैसे पूरी दुनिया का शोर
अचानक शांत हो गया हो|
तुम्हारी धड़कनों के पास
सिर रखकर
मैंने वह सुकून पाया है
जो किसी मंदिर,
किसी दरगाह,
किसी तीर्थ में भी नहीं मिला।
तुम्हारे बिना
मैं अधूरा नहीं,
बिखरा हुआ महसूस करता हूँ।
तुम्हारी आदत
धीरे-धीरे
मेरी रूह में उतर चुकी है,
अब तुम्हारे बिना
दिन नहीं कटते,
साँसें कटती हैं।
मैं चाहता हूँ
कि हर रात
तुम्हारी उँगलियाँ
मेरे बालों में उलझी रहें
और मैं
तुम्हारी आँखों में
अपनी पूरी जिंदगी पढ़ता रहूँ।
तुम केवल प्रेम नहीं हो,
तुम वह लत हो
जिससे मैं कभी मुक्त नहीं होना चाहता।
2. तुम्हारे बिना बेचैन रातें
रात के तीसरे पहर
जब पूरा संसार सो जाता है,
तब मेरी आँखें
तुम्हारे ख्यालों से जागती रहती हैं।
तुम्हारी तस्वीर को
बार-बार देखना
अब मेरी आदत नहीं,
मेरी मजबूरी बन चुका है।
तुम्हारी हँसी
मेरे कानों में
उस गीत की तरह गूँजती है
जिसे सुनकर
आँखें भीग जाती हैं।
कई बार
मैं तुम्हारा नाम
धीरे से बोलता हूँ,
सिर्फ यह महसूस करने के लिए
कि तुम अब भी
मेरे भीतर जीवित हो।
तुम्हारे बिना
मेरे कमरे की हवा भी
उदास लगती है।
मैंने प्रेम को
पहले कभी इतना गहरा नहीं जाना था,
जब तक कि
मैं तुम्हारी अनुपस्थिति में
टूटना नहीं सीख गया।
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