तुमने इतनी देर कर दी जवाब देने में...

1. 


तुमने इतनी देर कर दी जवाब देने में,

आख़िर क्यों...?

क्या वक़्त नहीं मिला,

या फिर दिल कहीं और मशग़ूल था...?


2. 


तुम्हारे एक जवाब की मुन्तज़िर थी मेरी रूह,

मगर तुमने ख़ामोशी को ही पैग़ाम बना दिया।

इतनी देर क्यों की तुमने,

क्या मेरा इश्क़ इतना मामूली था...?


3. 


तुम जवाब देते रहे ज़माने भर को,

बस मेरी बारी आते ही वक़्त ठहर गया।

आख़िर क्यों...?

क्या मेरा नाम अब दिल में नहीं उतरता...?


4. 


मैं हर लम्हा तुम्हारी आहट सुनता रहा,

और तुम ख़ामोशी की चादर ओढ़े रहे।

इतनी देर क्यों की तुमने जवाब देने में,

क्या मोहब्बत अब बोझ लगने लगी थी...?


5. 


तुम्हारी देर ने दिल को ये एहसास करा दिया,

कि चाहत अब पहले जैसी नहीं रही।

वरना मोहब्बत करने वाले,

जवाब देने में सदियाँ नहीं लगाते।


6. 


मैंने तो बस एक “हाँ” की उम्मीद की थी,

तुमने इंतज़ार को इबादत बना दिया।

आख़िर क्यों इतनी देर की तुमने,

क्या मेरी धड़कनों की सदा नहीं सुनाई दी...?


7. 


तुम्हारी ख़ामोशी ने बहुत कुछ कह दिया,

जो अल्फ़ाज़ कभी कह नहीं पाते।

इतनी देर से मिला जवाब तुम्हारा,

कि अब सवाल भी थक चुके हैं।


8. 


तुम्हारे जवाब से पहले ही,

मैंने हज़ार दफ़ा ख़ुद को समझाया।

मगर दिल हर बार पूछ बैठा—

आख़िर उसने इतनी देर क्यों की...?


9. 


जिसे हम अपनी दुनिया समझ बैठे थे,

उसे हमारे पैग़ाम का जवाब देने में वक़्त लगा।

शायद हम उतने ज़रूरी कभी थे ही नहीं।


10. 


तुम्हारे देर से आए हुए जवाब में,

वो गर्माहट नहीं थी जिसका इंतज़ार था।

लगता है मोहब्बत रास्ते में कहीं ठंडी पड़ गई।


11. 


तुमने इतनी देर कर दी जवाब देने में,

कि अब शिकवा भी ख़ामोश हो गया।

दिल ने भी कहना छोड़ दिया—

“शायद वो व्यस्त होंगे...”


12. 


मैं हर पल मोबाइल की रौशनी में तुम्हें ढूँढता रहा,

और तुम किसी और महफ़िल में मुस्कुराते रहे।

आख़िर क्यों किया तुमने ऐसा...?


13. 


तुम्हारा जवाब आया भी तो ऐसे,

जैसे कोई एहसान कर रहे हो।

मोहब्बत में इतनी बेरुख़ी अच्छी नहीं लगती।


14. 


मैंने तो हर लफ़्ज़ में तुम्हें चाहा था,

फिर भी तुमने इंतज़ार नसीब कर दिया।

इतनी देर क्यों की तुमने,

क्या मेरा दर्द दिखाई नहीं दिया...?


15. 


तुम्हारे जवाब का इंतज़ार करते-करते,

मैंने रातों को सुबह होते देखा है।

अब अगर जवाब भी आ जाए,

तो दिल पहले जैसा नहीं रहेगा।


16. 


कभी तुम फ़ौरन जवाब दिया करते थे,

आज घंटों की ख़ामोशी मिलती है।

मोहब्बत बदली है,

या फिर इंसान...?


17. 


तुमने देर से जवाब दिया,

मगर दिल ने फिर भी मुस्कुरा कर पढ़ लिया।

मोहब्बत सच में अजीब होती है,

नाराज़ भी उसी से होती है जिसे सबसे ज़्यादा चाहती है।


18. 


मैंने तुम्हारी ख़ामोशी में भी मोहब्बत ढूँढी,

मगर हर बार तन्हाई हाथ लगी।

आख़िर क्यों इतना दूर हो गए तुम...?


19. 


तुम्हारे जवाब की देरी ने,

मुझे मेरी औक़ात समझा दी।

कुछ रिश्ते चाहत से नहीं,

सिर्फ़ आदत से निभाए जाते हैं।


20. 


तुमने इतनी देर कर दी जवाब देने में,

कि अब दिल डरने लगा है।

कहीं ऐसा न हो,

कि एक दिन मैं भी ख़ामोश हो जाऊँ… हमेशा के लिए।

Comments

Popular Posts