हर बार जब मैं उसे देखता हूँ...

हर बार जब मैं उसे देखता हूँ,
समय जैसे ठहर सा जाता है,
दुनिया की सारी हलचल
एक पल में शांत हो जाती है।

उसकी आँखों में जैसे कोई कहानी है,
जिसे पढ़ते-पढ़ते मैं खुद को भूल जाता हूँ,
वो मुस्कान… जैसे सवेरा,
जो हर अंधेरे को चुपचाप मिटा जाता है।

हर बार जब मैं उसे देखता हूँ,
ये एहसास और गहरा हो जाता है—
कि इस सृष्टि में, इस भीड़ में,
उससे खूबसूरत कुछ भी नहीं है।

न चाँद की चांदनी, न तारों की झिलमिल,
न फूलों की खुशबू, न बारिश की हलचल,
सब कुछ फीका पड़ जाता है
जब वो सामने आ जाती है।

उसकी बातों में एक सुकून है,
जैसे थके हुए दिल को घर मिल गया हो,
उसकी खामोशी भी इतनी प्यारी है,
जैसे किसी गीत का सबसे मधुर सुर हो।

मैंने दुनिया को बहुत करीब से देखा है,
खुशियों को भी, दर्द को भी,
पर जो सुकून उसकी एक झलक में है,
वो कहीं और नहीं पाया मैंने कभी।

हर बार जब वो हँसती है,
दिल के कोने-कोने में उजाला भर जाता है,
जैसे सूखी धरती पर पहली बारिश,
जो हर जख्म को सहला जाती है।

उसकी मौजूदगी एक एहसास है,
जिसे शब्दों में बांधना आसान नहीं,
वो कोई ख्वाब नहीं, हकीकत है,
जिससे ज्यादा खूबसूरत कोई अरमान नहीं।

कभी सोचता हूँ, ये कैसा जादू है,
जो हर बार मुझे उसी ओर खींच लाता है,
शायद ये मोहब्बत ही है,
जो हर नज़र में उसे और हसीन बनाता है।

हर बार जब मैं उसे देखता हूँ,
मैं खुद को थोड़ा और पा लेता हूँ,
उसकी आँखों में अपना अक्स देखकर
जीने का नया मतलब समझ लेता हूँ।

दुनिया चाहे कुछ भी कहे,
मापे खूबसूरती को अपने तराजू में,
मेरे लिए तो सच यही है—
उससे बढ़कर कुछ भी नहीं इस जहाँ में।

हर बार जब मैं उसे देखता हूँ,
दिल बस यही कहता है—
कि अगर खूबसूरती का कोई नाम है,
तो वो बस वही है… वही है… वही है।

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