मैं तुमसे प्रेम करता हूँ, और मुझे इसमें कोई शर्म नहीं है।
मैं तुमसे प्रेम करता हूँ,
और मुझे इसमें कोई शर्म नहीं है।
यह कोई क्षणिक आकर्षण नहीं,
न ही शब्दों का कोई सुंदर भ्रम है।
यह वह अनुभूति है
जो धीरे-धीरे आत्मा में उतरती है
और फिर वहीं अपना घर बना लेती है।
मैं यह बात बार-बार कहूँगा,
हर उस दिन जब दुनिया मुझे समझने से इंकार करेगी,
हर उस रात जब मन थककर
किसी अपने की तलाश करेगा।
मैं कहूँगा कि
मैं तुम्हारे साथ खुश हूँ।
मुझे अच्छा लगता है तुमसे बातें करना,
क्योंकि तुम्हारे शब्द
सिर्फ कानों तक नहीं पहुँचते,
वे भीतर उतरते हैं—
उस जगह तक
जहाँ अक्सर कोई पहुँच नहीं पाता।
तुमसे बात करना ऐसा लगता है
जैसे वर्षों से बंद किसी कमरे की खिड़की खुल जाए
और भीतर ताज़ी हवा चली आए।
तुम्हारी हँसी में
एक अजीब-सी शांति है,
और तुम्हारी खामोशी में भी
एक गहरा अपनापन।
मुझे अच्छा लगता है
तुम्हारे साथ रहना।
क्योंकि तुम्हारे पास होकर
मुझे किसी और होने का अभिनय नहीं करना पड़ता।
मैं वैसा ही रह सकता हूँ
जैसा सच में हूँ—
थोड़ा टूटा हुआ,
थोड़ा उलझा हुआ,
पर पूरी तरह सच्चा।
पर ऐसा क्यों?
बाकी लोग भी तो हैं।
दुनिया में चेहरों की कमी नहीं,
बातें करने वालों की भी नहीं।
हर मोड़ पर कोई न कोई मिल ही जाता है,
फिर तुम्हीं क्यों?
तो मैं इतना ही कहूँगा—
बाकी कारण तो हैं ही,
पर उनका सम्मान
मेरे लिए बहुत गहरा है।
क्योंकि कुछ रिश्तों के कारण
शब्दों में नहीं कहे जाते।
उन्हें समझाने की कोशिश
उनकी पवित्रता को छोटा कर देती है।
कुछ लोग हमारे जीवन में
तर्क बनकर नहीं आते,
वे एहसास बनकर आते हैं।
तुम्हारे भीतर
जो सरलता है,
जो करुणा है,
जो दूसरों को समझ लेने की अद्भुत क्षमता है,
वही तुम्हें सबसे अलग बनाती है।
तुम्हारे पास होने से
जीवन अचानक आसान तो नहीं हो जाता,
पर उसे जीने की इच्छा अवश्य बढ़ जाती है।
तुम्हारे होने से
दिनों में उजाला थोड़ा और बढ़ जाता है,
और कठिन समय भी
इतना कठोर नहीं लगता।
मैंने बहुत लोगों को देखा है—
कुछ सुंदर थे,
कुछ बुद्धिमान,
कुछ सफल,
कुछ बेहद आकर्षक।
पर तुममें जो बात है,
वह किसी तुलना में नहीं आती।
तुम्हारे भीतर
एक सच्चाई है
जो दिखावे से परे है।
एक आत्मीयता है
जो बिना माँगे अपनापन दे देती है।
और शायद इसी कारण
मैं बार-बार तुम्हारी ओर लौट आता हूँ।
भीड़ में भी
मन तुम्हें ही खोजता है।
खुशी में भी
तुम्हें बताने का मन करता है,
और दुःख में भी
तुम्हारे पास बैठने का।
मैं तुमसे प्रेम करता हूँ—
यह केवल एक वाक्य नहीं,
यह मेरे अस्तित्व का स्वीकार है।
और यही चीज़
उसे दुनिया से अलग करती है।
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