मेरा अंग-अंग तड़पता है तेरी याद में...

मेरा अंग-अंग तड़पता है तेरी याद में,
रातें कट रही हैं बस तेरे इंतज़ार में।
कितने साल हो गए हैं सुकून की नींद सोए,
आँखें जागती रहती हैं तेरे ही ख़ुमार में।

चाँद भी अधूरा लगता है तेरे बिना,
सितारे भी खो जाते हैं इस अँधेरे संसार में।
हर धड़कन पुकारे तेरा ही नाम,
जैसे साँसें बंधी हों तेरे ही प्यार में।

तेरे बिना ये मौसम भी रूठे-रूठे से हैं,
बहारें भी सिमट गई हैं वीरान बहार में।
दिल की हर एक धड़कन बस तुझको चाहे,
मैं खो गया हूँ तेरे ही इकरार में।

कभी तो लौट आओ मेरी तन्हा राहों में,
थक गया हूँ यूँ ही जीने के इस व्यवहार में।
तेरे बिना अब कुछ भी अच्छा नहीं लगता,
जिंदगी अटक गई है तेरे ही इंतज़ार में।

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