तेरी यादों की चादर ओढ़े जी रहा हूँ मैं...
तेरी यादों की चादर ओढ़े जी रहा हूँ मैं,
हर साँस में बस तुझे ही पिरो रहा हूँ मैं।
ये रातें जैसे सदी बनकर ठहर जाती हैं,
तेरे बिना हर पल को ढो रहा हूँ मैं।
आँखों में नींद का कोई किनारा नहीं,
ख्वाबों में भी अब तेरा सहारा नहीं।
जो कभी तेरी हँसी से रोशन था दिल,
अब उस उजाले का भी गुज़ारा नहीं।
हवाएँ भी तेरी बातें सुनाती हैं मुझको,
हर खुशबू तेरी याद दिलाती है मुझको।
मैं जहाँ भी देखूँ, तू ही तू नज़र आती है,
ये दुनिया भी अब तुझमें समाती है मुझको।
कितनी दफ़ा खुद को समझाया मैंने,
कि भूल जाऊँ तुझे, ये ठाना मैंने।
पर दिल ने हर बार यही कहा मुझसे,
कि तू ही मेरी दुनिया, तू ही ठिकाना है मेरे।
तेरे बिना ये रास्ते सूने-सूने से हैं,
हर मोड़ पर अधूरे अफ़साने से हैं।
चलते-चलते थक गया हूँ मैं यूँ ही,
जैसे कदम भी अब बेगाने से हैं।
कभी तो लौट आओ मेरी आवाज़ सुनकर,
कभी तो थाम लो हाथ मेरा यूँ ही चलकर।
मैंने हर दुआ में बस तुझको ही माँगा है,
तू ही तो वजह है मेरे हर पल धड़कने का बनकर।
ये दिल अब भी तेरा इंतज़ार करता है,
हर दर्द को चुपचाप स्वीकार करता है।
तेरे आने की उम्मीद में जी रहा हूँ,
वरना ये साँसें भी कब का इनकार करतीं।
तेरी एक झलक के लिए तरसता हूँ मैं,
तेरे एक लफ्ज़ के लिए बरसता हूँ मैं।
तू नहीं तो कुछ भी नहीं इस जहाँ में,
तेरे बिना खुद से भी बिछड़ता हूँ मैं।
आ जा कि अब सब्र टूटने लगा है,
ये दिल भी अब रूठने लगा है।
बहुत जी लिया तेरे बिना इस तरह,
अब हर पल बस तुझमें ही डूबने लगा है।
Comments
Post a Comment