तेरी चाहत का अंदाज़ क्या लिखूँ...

तेरी चाहत का अंदाज़ क्या लिखूँ,
मेरे हर लफ़्ज़ में तेरा ही नाम उतरता है।
मैं जितना खुद को पढ़ता हूँ हर रात,
उतना ही तू मेरी रूह में गहराता है।

तू सिर्फ़ एक एहसास नहीं, मेरी आदत है,
जैसे सांसों को जीने की इजाज़त है।
मैं अगर खामोश भी रहूँ तो समझ लेना,
मेरी हर चुप्पी में भी तेरी मोहब्बत है।

तू है तो ये दुनिया भी रोशन लगती है,
तेरे बिना हर सुबह अधूरी सी लगती है।
मैंने खुद को खो दिया है तेरी चाहत में,
अब तेरी मुस्कान ही मेरी पहचान लगती है।

तुझे चाहना कोई इबादत से कम नहीं,
तेरे बिना जीना अब मेरे बस में नहीं।
मैं हर जन्म में तुझे ही माँगता रहूँ,
क्योंकि तुझसे ज़्यादा कोई अपना नहीं।

अगर कभी दूर भी हो जाऊं तुझसे,
तो ये मत समझना कि भूल गया हूँ।
मैं हर धड़कन में तुझे बसाए रखता हूँ,
मैं खुद में नहीं, तुझमें ही कहीं खो गया हूँ। 💔✨

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