“सही चुनाव”

“सही चुनाव”

कहते हैं लोग—
सही राह चुनो,
मंज़िल खुद मुस्कुरा देगी,
पर किसे बताऊँ मैं,
हर सही राह पर खुशियाँ नहीं मिलती।

कभी-कभी
दिल को चुप कराना पड़ता है,
और दिमाग़ की सुननी पड़ती है,
वहीं से शुरू होती है
एक खामोश सी उदासी।

मैंने भी चुना था
वो रास्ता जो ठीक था,
जिसमें कोई गलती नहीं थी,
पर उसमें तुम नहीं थे,
और शायद यही उसकी सबसे बड़ी कमी थी।

हर मोड़ पर सही होना
ज़रूरी तो है,
पर हर मोड़ पर खुश रहना
मुमकिन नहीं होता।

कभी सही फैसले
दिल को तोड़ देते हैं,
और हम मुस्कुराते हुए भी
अंदर से बिखर जाते हैं।

फिर भी चलना पड़ता है,
उसी राह पर,
जहाँ सुकून कम
और सच्चाई ज़्यादा होती है।

क्योंकि जिंदगी में
हर बार खुशी नहीं,
कभी-कभी
सही होना ही सबसे बड़ी जीत होती है।

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