बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ...

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ ... 

वो जब आई थी इस धरती पर,
सन्नाटा सा घर में छा गया,
कुछ चेहरों पर खामोशी थी,
जैसे कोई सपना खो गया।

पर किसी ने ये क्यों ना देखा,
वो जीवन की एक नई धुन है,
वो सिर्फ एक नन्हीं सी बच्ची नहीं,
वो आने वाले कल की गूंज है।
उसकी आँखों में चमक थी ऐसी,
जैसे तारों का कोई संसार,
उसके छोटे-छोटे हाथों में,
छुपा था एक बड़ा विस्तार।

क्यों बाँध देते हो उसे तुम,
पुरानी सोच की जंजीरों में?
क्यों रोकते हो उसकी उड़ान,
समाज की कठोर लकीरों में?
वो भी चाहती है छूना गगन,
वो भी चाहती है उड़ना दूर,
उसके सपनों को पंख दो तुम,
ना रहने दो उन्हें मजबूर।

जब वो स्कूल की राह पकड़े,
किताबों से उसका नाता हो,
हर अक्षर में उसे मिले,
एक नई दुनिया का पता हो।
वो पढ़ेगी तो समझेगी,
जीवन के हर एक रंग को,
वो बढ़ेगी तो बदल देगी,
इस दुनिया के हर ढंग को।

मत सोचो उसे कमजोर कभी,
वो शक्ति का एक सागर है,
उसकी मुस्कान में छुपा हुआ,
पूरा जीवन का आगर है।
वो माँ बनकर सृजन करेगी,
वो बहन बनकर साथ निभाएगी,
वो बेटी बनकर हर आँगन में,
खुशियों के फूल खिलाएगी।

पर इन सबसे पहले उसे,
एक इंसान बनना है,
अपने सपनों की राहों पर,
खुद चलकर कुछ करना है।
जब उसे शिक्षा का अधिकार मिलेगा,
तो उसका आत्मविश्वास जगेगा,
हर बंधन टूटता जाएगा,
और नया इतिहास बनेगा।

सोच बदलनी होगी अब हमें,
ये जिम्मेदारी सबकी है,
हर बेटी की मुस्कान में ही,
इस दुनिया की असली खुशी है।
बेटी बचाओ, ये केवल नारा नहीं,
ये एक गहरी पुकार है,
हर दिल से उठती हुई,
एक सच्ची जिम्मेदार है।

बेटी पढ़ाओ, ताकि वो,
अपने अस्तित्व को पहचान सके,
अपने हौसलों के बल पर,
हर ऊँचाई को छान सके।
जब हर बेटी सुरक्षित होगी,
जब हर बेटी शिक्षित होगी,
तभी तो ये धरती सच में,
एक सुंदर स्वर्ग जैसी होगी।

आओ मिलकर ये वादा करें,
ना कोई भेदभाव होगा,
हर बेटी को समान हक,
हर घर में उसका मान होगा।
वो ही कल का सूरज बनेगी,
वो ही नई दिशा दिखाएगी,
हर अंधेरे को चीर कर,
वो उजाला फैलाएगी।

बेटी है तो जीवन है,
बेटी है तो हर सपना है,
उसके बिना अधूरी दुनिया,
उससे ही पूरा हर अपना है।
तो आओ उसके साथ चलें,
उसकी राह आसान बनाएं,
बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ,
इस सपने को साकार बनाएं।

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