समानता का सपना
समानता का सपना
एक ऐसा समाज हो,
जहाँ कोई भेदभाव ना हो,
जहाँ बेटी और बेटा,
दोनों में कोई अंतर ना हो।
जहाँ हर बेटी को मिले,
पढ़ने और बढ़ने का अधिकार,
जहाँ हर सपना उसका,
हो सके साकार।
जब ये सपना सच होगा,
तभी सच्ची आज़ादी होगी,
हर बेटी की मुस्कान में,
नई दुनिया की झलक होगी।
बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ,
ये सिर्फ शब्द नहीं हैं,
ये एक नई सोच का प्रतीक हैं,
जो भविष्य की नींव हैं।
भविष्य की नींव
हर बेटी में छुपा है,
कल का एक उज्ज्वल रूप,
जो अपने ज्ञान और साहस से,
बदल सकती है हर स्वरूप।
उसे पढ़ाओ, उसे बढ़ाओ,
उसके सपनों को पंख दो,
उसकी राह में आने वाले,
हर बंधन को तोड़ दो।
जब हर बेटी शिक्षित होगी,
तो समाज सशक्त बनेगा,
हर घर में खुशहाली आएगी,
देश प्रगति की राह चलेगा।
बेटी ही है भविष्य हमारा,
बेटी ही है सम्मान,
उसके बिना अधूरा हर सपना,
उससे ही है हर पहचान।
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