तू मेरी ज़िंदगी की बहार है...

तू मेरी ज़िंदगी की बहार है,
सूखे दिल की पहली फुहार है।
तेरे आने से हर मौसम हँसने लगा,
तू ही तो मेरा सारा संसार है।

जब तू मिली, जैसे पतझड़ खत्म हो गया,
हर सूना कोना फिर से हरा हो गया।
तेरी हँसी में वो राग है, जो दिल को छू जाए,
तेरी मौजूदगी से हर दर्द भी हल्का हो गया।

तू आई तो हवाओं में खुशबू बस गई,
मेरी दुनिया जैसे रंगों से भर गई।
जो ख्वाब अधूरे थे, वो खिलने लगे,
तेरे साथ हर चाहत मुकम्मल हो गई।

मैं सूखी ज़मीन था, तू सावन बनकर आई,
मेरी खामोशियों में भी तूने धुन जगाई।
तेरे बिना सब कुछ बेजान सा था,
तूने ही मेरी ज़िंदगी में रौनक लाई।

तू बहार है, तो मैं तेरा इंतज़ार हूँ,
तू खुशबू है, तो मैं तेरा गुलज़ार हूँ।
तेरे बिना ये दिल कहीं लगता नहीं,
तू है तो मैं हूँ—वरना मैं बस एक ख़ाली सा संसार हूँ।

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