छन छन छन छन पायल बोली...

छन छन छन छन पायल बोली,

रात ने चुपके चाँदनी खोली,

जब तुम धीरे से मुस्काई थीं,

सारी दिशाएँ महक आई थीं।


तुम्हारे आने से जैसे

मौसम को भाषा मिल जाती है,

सूखे हुए मन के उपवन में

फिर से हरियाली छा जाती है।


तुम्हारी आँखें—

मानो शांत झील पर ठहरी हुई सांझ,

जहाँ कोई चाँद अपना प्रतिबिंब खोजता हो।

मैं जब उनमें देखता हूँ,

तो स्वयं को भूल जाता हूँ,

और केवल तुम्हारा हो जाता हूँ।


तुम्हारे अधरों की वह हल्की मुस्कान,

मानो गुलाब की पंखुड़ियों पर

ओस की पहली बूँद उतर आई हो।

तुम्हारी हँसी में एक ऐसा संगीत है

जो किसी वीणा से नहीं,

सीधे आत्मा से निकलता है।


जब तुम अपने केशों को

धीरे से कानों के पीछे करती हो,

समय ठहर जाता है।

हवा भी तुम्हें देखने लगती है,

और चाँद अपनी चाँदनी कम कर देता है,

क्योंकि तुम्हारे चेहरे की आभा के सामने

उसका प्रकाश भी फीका लगता है।


तुम्हारी चाल में

किसी नदी की मधुर लय है,

और तुम्हारे स्पर्श में

एक ऐसा अपनापन

जो टूटे हुए मन को भी

फिर से जीना सिखा दे।


तुम्हारे साथ बिताया हर क्षण

मेरे जीवन का सबसे सुंदर श्लोक है।

तुम्हारी उँगलियों का स्पर्श

जब मेरी हथेलियों से मिलता है,

तो लगता है जैसे

सृष्टि ने प्रेम को आकार दे दिया हो।


तुम्हारे बिना दिन अधूरा लगता है,

और रात केवल प्रतीक्षा बन जाती है।

तुम्हारी आवाज़ सुनते ही

मन के भीतर हजारों दीपक जल उठते हैं।

तुम केवल प्रेम नहीं हो,

तुम वह शांति हो

जिसे मेरी आत्मा जन्मों से खोज रही थी।


कभी-कभी सोचता हूँ—

क्या सच में कोई इतना सुंदर हो सकता है?

इतना कोमल, इतना गहरा,

कि उसके होने मात्र से

दुनिया की सारी कठोरता पिघल जाए।


तुम्हारी आँखों में मैंने

अपने भविष्य का घर देखा है,

जहाँ प्रेम शब्द नहीं,

एक स्वाभाविक साँस बनकर बहता है।


छन छन छन छन पायल गाए,

मन के सारे दीप जलाए,

तेरे संग यह जीवन मेरा

जैसे पूर्ण हुआ सवेरा।


यदि प्रेम कोई पूजा है,

तो तुम मेरी प्रार्थना हो।

यदि प्रेम कोई ऋतु है,

तो तुम मेरा अनंत सावन हो।

यदि प्रेम कोई कविता है,

तो तुम उसका सबसे सुंदर छंद हो।


मैं हर जन्म में

तुम्हें इसी तरह चाहना चाहूँगा—

बिना किसी भय के,

बिना किसी शर्त के,

बस उतनी ही सच्चाई से

जितनी सच्चाई से चाँद

हर रात आकाश में लौट आता है।


और जब कभी

यह दुनिया बहुत शोर करने लगे,

तब तुम बस मेरा हाथ थाम लेना,

क्योंकि तुम्हारे स्पर्श में ही

मुझे अपना समस्त संसार मिलता है।

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