नर्मी का उजाला
नर्मी का उजाला
हो सकता है
तुम्हें अपनी नर्मी से शिकायत हो,
तुम सोचते हो—
क्यों दिल इतना मुलायम है,
क्यों हर दर्द
तुम्हारे अंदर घर बना लेता है।
तुम्हें लगता है
कि यह नर्मी कमजोरी है,
एक ऐसा बोझ
जो हर रिश्ते में तुम्हें झुका देता है,
हर विदाई में तुम्हें तोड़ देता है,
हर खामोशी में तुम्हें डुबो देता है।
पर सच इतना सरल नहीं होता।
कहीं दूर
कोई दुआ में हाथ उठाए बैठा है,
वो माँग रहा है
एक ऐसा दिल
जो पत्थर न हो,
जो एहसासों से भरा हो,
जो टूटकर भी
दूसरों को जोड़ने की हिम्मत रखे।
तुम्हारी यही नर्मी
किसी के लिए मरहम है,
तुम्हारी यही खामोशी
किसी के शोर को सुकून देती है,
तुम्हारी यही आँखें
किसी के आँसुओं को समझ लेती हैं
बिना कुछ कहे।
तुम खुद से लड़ते हो—
क्यों इतना महसूस करता हूँ मैं?
क्यों हर छोटी बात
दिल तक पहुँच जाती है?
क्यों हर बिछड़ना
इतना गहरा असर छोड़ जाता है?
क्योंकि तुम ज़िंदा हो,
सिर्फ साँसों में नहीं,
बल्कि एहसासों में भी।
नर्मी वो चिंगारी है
जो अँधेरे में भी उजाला ढूँढ लेती है,
वो बारिश है
जो सूखी ज़मीन को फिर से जीना सिखाती है,
वो लहर है
जो किनारों को बार-बार छूकर
अपना वजूद बताती है।
तुम्हें लगता है
कि दुनिया कठोर है,
और तुम्हारी नर्मी
इसमें टिक नहीं पाएगी,
पर सच यह है—
दुनिया को तुम्हारी ही ज़रूरत है।
हर कठोर दिल के पीछे
एक अधूरी कहानी होती है,
हर सख्त चेहरा
कभी न कभी रोया होता है,
और वही लोग
तुम्हारी नर्मी को देखकर
खुद को फिर से महसूस करते हैं।
तुम्हारी मुस्कान
किसी के दिन की शुरुआत बन सकती है,
तुम्हारी खामोशी
किसी की थकान का अंत हो सकती है,
तुम्हारा साथ
किसी की सबसे बड़ी राहत बन सकता है।
तो क्यों डरते हो अपनी नर्मी से?
यह कमजोरी नहीं,
यह एक ताकत है—
जो हर किसी के पास नहीं होती,
जो हर कोई समझ नहीं पाता।
तुम्हारा दिल
एक दीपक की तरह है,
जो खुद जलकर
दूसरों को रोशनी देता है,
और शायद कभी-कभी
हवा से काँप भी जाता है।
पर याद रखना—
दीपक का काम बुझना नहीं,
जलते रहना है।
और तुम भी
वैसे ही हो।
एक दिन
तुम खुद समझोगे
कि तुम्हारी यही नर्मी
तुम्हारी सबसे बड़ी पहचान है,
तुम्हारी सबसे बड़ी जीत है।
और उस दिन
तुम खुद से कहोगे—
"अच्छा हुआ
मैं पत्थर नहीं बना,
अच्छा हुआ
मैंने महसूस करना नहीं छोड़ा।"
क्योंकि
दुनिया में सबसे खूबसूरत चीज़
एक नर्म दिल ही तो है—
जो हर दर्द के बाद भी
मोहब्बत करना नहीं भूलता।
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