बेटी: एक अनंत संभावना

बेटी: एक अनंत संभावना

रात के सन्नाटे में जब
आशाओं की धीमी आहट होती है,
तभी कहीं एक नन्हीं धड़कन
जीवन से पहली बात करती है।
वो आती है चुपके से,
जैसे ओस की बूँद किसी पत्ती पर,
न कोई शोर, न कोई दावा,
बस एक उजाला अपने भीतर।

पर दुनिया के तराज़ू पर
उसे तौला जाता है अक्सर,
खुशियों के पल ठहर जाते हैं,
और सवालों का बढ़ता है सफर।
क्यों?
क्या उसका होना कम है?
क्या उसकी साँसों में कम संगीत है?
या उसके सपनों का रंग
किसी और से कम अजीब है?

वो भी तो वही आसमान देखती है,
वही बादलों से बातें करती है,
वो भी तो अपने मन में
हज़ारों इच्छाएँ भरती है।
पर जब कदम बढ़ाने लगती है,
तो राहों में दीवारें खड़ी मिलती हैं,
हर मोड़ पर जैसे परंपराएँ
उसकी उड़ान से लड़ती मिलती हैं।

फिर भी, वो रुकती नहीं,
वो थमती नहीं, वो झुकती नहीं,
वो हर दर्द को चुपचाप सहकर
अपनी पहचान खुद बुनती है यहीं।
जब उसके हाथों में किताब आती है,
तो जैसे दुनिया बदलने लगती है,
हर अक्षर उसके भीतर
नई रोशनी जलाने लगती है।

वो पढ़ती है तो समझती है,
वो समझती है तो सवाल करती है,
और सवालों के इसी साहस से
वो हर जंजीर को हल्का करती है।
किताबें उसके लिए सिर्फ पन्ने नहीं,
वे उसके पंख हैं, उसकी उड़ान हैं,
जो उसे उस ऊँचाई तक ले जाती हैं,
जहाँ बस उसका ही आसमान है।

जब वो शिक्षा से सशक्त होती है,
तो उसकी आवाज़ बदल जाती है,
जो कभी दबा दी जाती थी,
अब समाज में गूंज जाती है।
वो खेतों में मेहनत बनती है,
वो शहरों में नई पहचान बनती है,
वो विज्ञान में खोज बनती है,
वो कला में एक नई उड़ान बनती है।

वो सिर्फ रिश्तों की परिभाषा नहीं,
वो खुद में एक सम्पूर्ण संसार है,
उसकी सोच, उसका साहस
इस युग का असली विस्तार है।
बेटी बचाओ —
क्योंकि हर जीवन अनमोल है,
हर धड़कन में छुपा हुआ
एक अनकहा अनंत मोल है।

बेटी पढ़ाओ —
क्योंकि शिक्षा ही वह दीप है,
जो अज्ञान के अंधेरों में
उम्मीद का उजला नसीब है।
जब हर घर में एक बेटी
निडर होकर मुस्काएगी,
तभी तो इस समाज की तस्वीर
सच में बदलती नज़र आएगी।

ना कोई डर, ना कोई भेद,
ना कोई रोके उसके कदम,
वो खुले गगन में उड़ेगी,
और खुद लिखेगी अपना करम।
वो कल की नीति बनाएगी,
वो आज की सोच बदल देगी,
वो हर असमानता के विरुद्ध
एक नई क्रांति जगा देगी।

तो आओ, उसकी राह बनें,
उसके सपनों का साथ दें,
हर बंद दरवाज़े को खोलकर
उसे आगे बढ़ने का हाथ दें।
क्योंकि जब वो चलेगी,
तो समय भी साथ चलेगा,
जब वो जगेगी,
तो हर अंधेरा पीछे ढलेगा।

बेटी है तो भविष्य है,
बेटी है तो विश्वास है,
उसके बिना हर उपलब्धि
सिर्फ अधूरा इतिहास है।
इसलिए आज ये प्रण करो,
हर सोच को नया आकार दो,
बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ,
और जीवन को सच्चा सार दो।

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