अगर तुमने प्रेम नहीं किया है तो करो...

अगर तुमने प्रेम नहीं किया है

तो करो—

क्योंकि प्रेम

मनुष्य होने का सबसे दिव्य प्रमाण है।


प्रेम केवल किसी को पा लेना नहीं,

यह स्वयं को खोकर

किसी और में जीवित हो जाने की साधना है।


प्रेम वह दीप है

जो आत्मा के अंधकार में

धीरे-धीरे उतरता है,

और फिर भीतर

एक नया ब्रह्मांड जगा देता है।


यह वह अनुभूति है

जहाँ शब्द छोटे पड़ जाते हैं,

और मौन भी

कविता बन जाता है।


प्रेम में

धरती अधिक सुंदर लगती है,

आकाश अधिक विस्तृत,

और मनुष्य

पहली बार सचमुच जीवित प्रतीत होता है।


जिसने प्रेम किया,

उसने ईश्वर को छुआ—

भले ही

उसने किसी मंदिर की देहरी न देखी हो।


प्रेम में प्रतीक्षा भी पूजा है,

विरह भी तपस्या है,

और किसी की मुस्कान के लिए

अपने दुःखों को छुपा लेना

सबसे पवित्र त्याग है।


यह संसार

ज्ञान से चल सकता है,

विज्ञान से बदल सकता है,

पर केवल प्रेम ही

इसे मानवीय बनाता है।


यदि जीवन में

तुमने कभी किसी के लिए

रातों को जागकर प्रार्थना की हो,

किसी की आवाज़ सुनकर

हृदय को काँपते महसूस किया हो,

किसी की अनुपस्थिति में

भीतर एक शून्य उतरता देखा हो—

तो समझना,

तुमने ब्रह्मांड का

सबसे दुर्लभ सत्य पा लिया है।


प्रेम

किसी ग्रंथ का अध्याय नहीं,

यह आत्मा का परम ज्ञान है।


और सच कहूँ—

इस नश्वर संसार में

यदि कुछ अमर है,

तो वह केवल प्रेम है।

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