बेटी की रोशनी...
बेटी की रोशनी
बेटी है सुबह की पहली किरण,
जो अंधेरों से लड़ना सिखाती है,
वो नन्हीं सी हँसी की झंकार,
जो हर दिल में उजाला भर जाती है।
मत रोको उसके कदमों को,
उसे आसमान तक जाने दो,
उसकी आँखों में जो सपने हैं,
उन्हें सच बनने का बहाना दो।
जब पढ़ेगी वो, बढ़ेगी दुनिया,
ज्ञान से उसका मान बढ़ेगा,
हर घर में खुशहाली आएगी,
जब बेटी का सम्मान बढ़ेगा।
उसकी उड़ान
वो चिड़िया है, खुले गगन की,
जिसे पिंजरे में कैद न करो,
उसकी उड़ान को पंख दो,
उसके सपनों को खंडित न करो।
कल की डॉक्टर, आज की बेटी,
कल की नेता, आज की आशा,
उसके कदमों में छिपा है भविष्य,
उसमें ही है देश की भाषा।
पढ़ेगी तो समझेगी दुनिया,
लड़ेगी हर अन्याय से,
बेटी को बस मौका चाहिए,
वो जीत लेगी हर लड़ाई से।
शिक्षा की ज्योति
ज्ञान की लौ जब जलती है,
तो अंधकार मिट जाता है,
बेटी जब स्कूल जाती है,
तो समाज बदल जाता है।
उसके हाथों में किताबें हों,
न कि बोझ किसी मजबूरी का,
उसकी राह में फूल बिछाओ,
न हो कांटा कोई दूरी का।
हर अक्षर उसके जीवन में,
नई दिशा दिखाता है,
बेटी पढ़े तो लगता है,
देश आगे बढ़ जाता है।
वो कम नहीं
क्यों कहते हो वो कम है,
जब वो हर रूप निभाती है,
माँ, बहन, बेटी बनकर,
हर रिश्ता निभाती है।
अब समय है सोच बदलने का,
उसे बराबरी का हक दो,
उसकी शिक्षा, उसका अधिकार,
उसको उसका हक दो।
वो भी कर सकती है सब कुछ,
जो तुमने अब तक किया है,
बस एक मौका उसे दे दो,
उसने खुद को साबित किया है।
नई सुबह
एक नई सुबह का सपना है,
जहाँ बेटी सुरक्षित हो,
जहाँ हर गली, हर चौखट पर,
उसका भविष्य सुनिश्चित हो।
ना डर हो, ना भेदभाव,
ना कोई बंधन की दीवार,
बेटी खुले मन से जी सके,
यही हो हर दिल का विचार।
उसकी हँसी में बसता है,
पूरे घर का सुकून,
बेटी पढ़े, बेटी बढ़े,
यही हो हर सुबह का जुनून।
Nice
ReplyDeleteThank u❤❤
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