तेरे जाने के बाद दिल का शहर वीरान-सा रहता है...

 1. 


तेरे जाने के बाद दिल का शहर वीरान-सा रहता है,

हर शाम तेरी यादों का धुआँ आँखों में बहता है।

मुद्दत हुई तेरा चेहरा देखे हुए मगर,

आज भी हर आईना तेरा ही अक्स कहता है।


2. 


तू क्या गई, मेरी रूह तक उदास हो गई,

मोहब्बत जैसे किसी ख़ामोश क़ब्र में सो गई।

अब तो चाँद भी अधूरा लगता है रातों में,

तेरी सूरत देखे बिना हर रोशनी खो गई।


3. 


बरसों नहीं सही, मगर कुछ अरसा तो हुआ है,

तेरे दीदार को तरसा ये दिल तन्हा हुआ है।

हर गली, हर मोड़ पर तेरा एहसास मिलता है,

जैसे मेरी साँसों में तेरा ही सिलसिला हुआ है।


4. 


तेरे बिन ये ज़िंदगी महज़ एक रस्म लगती है,

हर ख़ुशी भी अब अधूरी क़सम लगती है।

कभी जो तेरी हँसी से महक उठती थीं फ़िज़ाएँ,

अब वही हवाएँ भी बड़ी बेरहम लगती हैं।


5. 


न जाने किस शहर में तू आबाद होगी अब,

किसी और की बातों पर शायद शाद होगी अब।

मगर यहाँ तेरी याद का आलम ये है कि,

हर रात मेरी आँखें अश्क़ों से बरबाद होती हैं अब।


6. 


तेरे इंतज़ार में कितनी शामें गुज़र गईं,

दिल की तमाम ख़्वाहिशें यूँ ही बिखर गईं।

एक तेरा दीदार पाने की तमन्ना थी बस,

और उसी तमन्ना में उम्र की राहें ठहर गईं।


7. 


तेरी आवाज़ सुने भी एक ज़माना बीत गया,

मोहब्बत का वो हसीं अफ़साना बीत गया।

मगर अजीब बात है ऐ मेरे हमनशीं,

दिल से तेरा ख़याल आज तक नहीं गया।


8. 


तू सामने नहीं मगर एहसास आज भी है,

मेरे दिल में तेरी मोहब्बत की प्यास आज भी है।

लोग कहते हैं वक़्त सब भुला देता है मगर,

मेरी रूह को तेरे लौट आने की आस आज भी है।


9. 


तेरे बाद किसी से दिल लगाने का हुनर नहीं आया,

ज़ख़्म तो भर गए मगर जीने का असर नहीं आया।

हर रोज़ तेरी तस्वीर से बातें करता हूँ मैं,

मगर तेरी तरह कोई दिल के क़रीब नज़र नहीं आया।


10. 


मुझे आज भी तेरे क़दमों की आहट सुनाई देती है,

तन्हाई में तेरी मोहब्बत दिखाई देती है।

शायद तू लौट आए किसी रोज़ इसी उम्मीद में,

मेरी हर सुबह अब तक सजाई देती है।

Comments