मोहब्बत की बुझती हुई आँच...
मोहब्बत की बुझती हुई आँच...
हमारे बीच कभी
एक ऐसी तपिश हुआ करती थी
जो शब्दों से नहीं,
सिर्फ़ नज़रों से महसूस होती थी।
तुम्हारे पास बैठते ही
मन में जैसे दीप जल उठते थे,
और तुम्हारी उपस्थिति
मेरे भीतर के अँधेरों को
शांत कर देती थी।
तब प्रेम
कोई प्रयत्न नहीं था,
वह स्वाभाविक था—
नदी के बहाव जैसा,
हवा की सुगंध जैसा,
माँ की दुआ जैसा।
मगर अब…
अब सब कुछ बदल गया है।
तुम पास होकर भी
बहुत दूर लगती हो,
और मैं
तुम्हारे सामने बैठकर भी
तुम तक पहुँच नहीं पाता।
हमारी बातचीत में
अब वह बेचैनी नहीं रही
जो मिलने से पहले हुआ करती थी।
अब प्रतीक्षा नहीं जलती,
अब रातें करवटें नहीं बदलतीं,
अब तुम्हारा नाम देखकर
दिल की धड़कनें
पहले जैसी तेज़ नहीं होतीं।
कभी तुमसे मिलना
मेरे दिन का सबसे सुंदर हिस्सा था,
आज वही मुलाकातें
थके हुए समय की तरह बीत जाती हैं|
तुम मुस्कुराती तो हो,
पर वह मुस्कान
मेरे भीतर उतरती नहीं,
मैं सुनता तो हूँ तुम्हारी बातें,
पर उनमें अपना ज़िक्र महसूस नहीं करता।
शायद हमने प्रेम को
बहुत सहज मान लिया था,
शायद हमें लगा था
कि जो आज है
वह हमेशा रहेगा।
मगर रिश्ते
पेड़ों की तरह होते हैं,
यदि उन्हें समय, स्पर्श और संवेदना न मिले
तो वे भीतर से सूखने लगते हैं।
हमने एक-दूसरे को खोया नहीं,
पर संभालना भी छोड़ दिया।
तुम्हारी व्यस्तताएँ बढ़ती गईं,
मेरी चुप्पियाँ गहरी होती गईं,
और इसी बीच
हमारे प्रेम की आँच
धीरे-धीरे बुझती चली गई।
अब न तुम्हें शिकायतें हैं,
न मुझे कोई अधिकार शेष है,
बस एक अजीब-सी खामोशी है
जो हमारे बीच
दीवार बनकर खड़ी रहती है।
मैं कई बार सोचता हूँ—
क्या प्रेम सचमुच समाप्त हो गया है?
या वह कहीं भीतर
अब भी अंतिम साँसें ले रहा है?
क्योंकि कभी-कभी
तुम्हारी आँखों में
पुराने दिनों की हल्की-सी नमी दिखती है,
और मेरे भीतर
फिर से उम्मीद जन्म लेने लगती है।
शायद प्रेम पूरी तरह मरता नहीं,
वह बस थक जाता है,
दुनिया की भागदौड़,
अधूरी अपेक्षाओं
और अनकहे दुःखों के बोझ तले।
और फिर
दो लोग जो कभी
एक-दूसरे की दुनिया थे,
धीरे-धीरे
एक-दूसरे की आदत भर बन जाते हैं।
पर आज भी
यदि तुम एक बार
सचमुच मेरा हाथ थाम लो,
यदि तुम फिर से
उसी पुराने अपनत्व से मुझे पुकार लो,
तो शायद
हमारे प्रेम की बुझती हुई राख में
फिर कोई चिंगारी जन्म ले ले।
क्योंकि सच्चा प्रेम
कभी पूरी तरह समाप्त नहीं होता,
वह बस
किसी कोमल स्पर्श की प्रतीक्षा करता है।
Comments
Post a Comment