सपनों का अधिकार...

सपनों का अधिकार

हर बच्ची को हक है अपना,
खुलकर जीने का, बढ़ने का,
आसमान को छूने का,
अपने सपनों को गढ़ने का।

ना रोको उसे परंपराओं से,
जो अब बंधन बन चुकी हैं,
उसे उड़ने दो उस गगन में,
जहाँ उसकी राहें खुल चुकी हैं।

जब शिक्षा का दीप जलेगा,
तो अंधकार मिट जाएगा,
हर बेटी के आगे बढ़ने से,
देश का मान बढ़ जाएगा।

वो डॉक्टर, इंजीनियर बने,
या बने कोई कलाकार,
हर रूप में वो चमकेगी,
अगर मिले उसे सही आधार।




वो भी इंसान है

क्यों उसे समझा जाता है,
एक बोझ, एक जिम्मेदारी?
क्या उसका कोई सपना नहीं,
क्या उसकी कोई तैयारी?

वो भी तो इंसान है,
जिसे हँसने का अधिकार है,
जिसे अपने जीवन को,
अपने ढंग से जीने का विचार है।

उसे पढ़ाओ, उसे सिखाओ,
ज्ञान की राह दिखाओ,
उसके भीतर छुपी प्रतिभा को,
दुनिया के सामने लाओ।

जब वो खुद पर विश्वास करेगी,
तो हर मुश्किल आसान होगी,
बेटी की हर मुस्कान से,
नई दुनिया की पहचान होगी।

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