तुम शायद किसी शाम यूँ ही किसी मोड़ पर मिल जाओ किसी को...

तुम शायद किसी शाम

यूँ ही किसी मोड़ पर मिल जाओ किसी को,

जैसे बरसों की प्यास पर

पहली बारिश उतर आती है चुपचाप।


वो तुम्हारी हँसी को

अपनी किस्मत समझ बैठेगा,

तुम्हारी आँखों में

अपना आने वाला कल पढ़ लेगा।


और इधर कोई होगा—

जो हर रात

तुम्हारा नाम ओढ़कर सोता होगा,

जिसकी दुआओँ में

सिर्फ तुम्हारा ही ज़िक्र होगा।


जिसने चाँद को देखकर

तुम्हारी सलामती माँगी होगी,

जिसने टूटते तारों से लेकर

बुझते दीयों तक

हर चीज़ में तुम्हें तलाशा होगा।


तुम किसी के लिए

बस एक संयोग बनोगे,

और कोई तुम्हें

अपनी पूरी कायनात समझता रहेगा।


कितना अजीब होता है न—

मोहब्बत का तक़दीरों से हार जाना…

जिसे दिल ने अपना ख़ुदा माना,

वो किसी और की दुनिया बन जाए।


वो जो तुम्हारी तस्वीर देखकर

मुस्कुरा देता था चुपके से,

अब उसी तस्वीर को देखकर

आँखें भिगो लेता है।


उसकी उँगलियों में

अब भी तुम्हारे नाम की गर्मी बाकी है,

उसके कमरे में

अब भी तुम्हारी यादों की ख़ुशबू रहती है।


वो आज भी

भीड़ में तुम्हारे जैसे चेहरे खोजता है,

और हर बार

खुद से थोड़ा और हार जाता है।


तुम्हें क्या पता,

किसी ने तुम्हारे लिए

अपने भीतर कितनी दुनियाएँ उजाड़ी हैं।


किसी ने तुम्हारी ख़ुशी के लिए

अपनी तमाम इच्छाओं का गला घोंट दिया,

किसी ने तुम्हारी एक मुस्कान के बदले

अपने हिस्से का पूरा सुख त्याग दिया।


मगर मोहब्बत हमेशा मिल जाए,

ऐसा कहाँ होता है…


कुछ प्रेम

सिर्फ प्रार्थना बनकर रह जाते हैं,

कुछ लोग

सिर्फ याद बनकर जीते हैं।


वो जो तुम्हें पाने की तमन्ना में

हर दर पर सिर झुकाता रहा,

आख़िर में उसी को

तुम्हारी जुदाई नसीब हुई।


और तुम…

तुम किसी और के हाथों में

अपना हाथ रखकर

नए सपने सजाते रहे।


कभी अगर फुर्सत मिले

तो सोचना ज़रूर—

कि तुम्हारे यूँ ही चले आने से

किसी की ज़िंदगी मुकम्मल हुई होगी,

और तुम्हारे यूँ ही चले जाने से

किसी की रूह आज तक अधूरी है।


मोहब्बत का सबसे बड़ा दुःख यही है—

जिसे हम टूटकर चाहते हैं,

वो अक्सर

हमें उतनी शिद्दत से नहीं चाहता।


फिर भी लोग प्रेम करते हैं…

बार-बार करते हैं…

हारकर भी करते हैं…


क्योंकि उम्मीद

इंसान की आख़िरी इबादत होती है।


और कोई आज भी

तुम्हारे लौट आने की उम्मीद में

अपने दरवाज़े खुले रखे बैठा है…


कोई आज भी

रात के अंतिम पहर में

हाथ उठाकर दुआ करता है—


“ऐ ख़ुदा…

अगर उसे मेरी तक़दीर में नहीं लिखा,

तो कम-से-कम

मेरी मोहब्बत की लाज रख लेना…”


मगर तक़दीरें अक्सर

मोहब्बत से ज़्यादा बेरहम होती हैं।


तुम किसी को यूँ ही मिल जाओगे,

और कोई तुम्हें

सारी उम्र

दुआओँ में माँगता रह जाएगा… ।

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