“इंतज़ार की धड़कन”...
“इंतज़ार की धड़कन”
इससे ज़्यादा क्या कहूँ मैं,
शब्द भी अब थक जाते हैं,
तेरी यादों की गलियों में
ख़ामोशी ही गीत गाती है।
हाँ, इंतज़ार मुझको भी है,
पर सिर्फ़ मिलने का नहीं,
तेरे उस एहसास का
जो हर सांस में बसा कहीं।
रातें चुपचाप गुज़रती हैं,
तारों से बातें करता हूँ,
हर चमकते कण में तुझको
अपना कहकर पढ़ता हूँ।
वक़्त की रेत फिसलती है,
हाथों से हर पल जैसे,
पर तेरी आहट की उम्मीद
रोक लेती है दिल को वैसे।
कहने को तो बहुत कुछ है,
पर लफ़्ज़ कम पड़ जाते हैं,
जो दिल में है तेरे लिए
वो ख़ामोशी में ढल जाते हैं।
तू आए या ना आए मगर,
ये चाहत कम ना होगी,
इस इंतज़ार की हर धड़कन
तेरे नाम ही तो होगी।
Comments
Post a Comment