बेटियाँ: धूप, नदी और आकाश
बेटियाँ: धूप, नदी और आकाश
बेटियाँ केवल रिश्ते नहीं होतीं,
वे घर की साँसों में बसी हुई
एक मधुर अनुभूति होती हैं,
जैसे सर्द सुबह में
धीरे-धीरे उतरती धूप,
जैसे थके हुए मन पर
बरसती कोई शांत बारिश।
वे आती हैं
तो आँगन में केवल हँसी नहीं आती,
साथ में आती है
एक नई उम्मीद,
एक नया भरोसा,
कि जीवन अब पहले से अधिक सुंदर होगा।
उनकी छोटी उँगलियाँ
जब किसी की हथेली थामती हैं,
तो केवल हाथ नहीं पकड़तीं,
वे टूटते हुए साहस को भी
फिर से जीना सिखाती हैं।
बेटियाँ नदी की तरह होती हैं—
रुकती नहीं,
थकती नहीं,
पत्थरों से टकराकर भी
अपना संगीत नहीं खोतीं।
वे चुप रहकर भी
घर की हर पीड़ा पढ़ लेती हैं,
माँ की आँखों की नमी,
पिता की आवाज़ की थकान,
सब समझ जाती हैं
बिना किसी शब्द के।
कभी वे रसोई की खुशबू बनती हैं,
कभी किताबों में खोया हुआ सपना,
कभी आँगन की चिड़िया,
तो कभी संघर्षों के बीच
खड़ा हुआ एक विशाल वृक्ष।
समय उन्हें बहुत जल्दी बड़ा कर देता है,
पर उनके भीतर
एक मासूम बच्ची हमेशा रहती है,
जो अपने हिस्से की बारिश में
कागज़ की नाव चलाना चाहती है।
बेटियाँ त्याग का दूसरा नाम नहीं,
वे अधिकार की नई परिभाषा हैं,
वे यह बताने आई हैं
कि सपनों पर
सिर्फ बेटों का नहीं,
हर जन्म लेने वाली धड़कन का हक़ होता है।
उन्हें मत बाँधो
पुरानी सोच की दीवारों में,
वे हवा हैं—
कैद नहीं की जा सकतीं।
उन्हें मत रोको
ऊँची उड़ान भरने से,
वे आकाश हैं—
सीमाओं में नहीं समा सकतीं।
जब एक बेटी पढ़ती है,
तो केवल एक जीवन नहीं बदलता,
पूरी पीढ़ियाँ
अपने अंधेरों से बाहर निकलती हैं।
जब एक बेटी मुस्कुराती है,
तो लगता है जैसे
ईश्वर ने दुनिया को
फिर से सुंदर बनाने की कोशिश की हो।
वे खेतों में हरियाली बनती हैं,
सीमाओं पर साहस बनती हैं,
विद्यालयों में ज्ञान बनती हैं,
और घरों में प्रेम की भाषा।
उनके बिना यह संसार
सिर्फ ईंटों का शहर रह जाएगा,
क्योंकि संवेदनाओं की असली मिट्टी
बेटियों के हृदय में बसती है।
वे दीपक भी हैं
और उसकी लौ भी,
वे गीत भी हैं
और उसकी धुन भी।
बेटियाँ इस पृथ्वी की
सबसे शांत शक्ति हैं,
जो टूटकर भी
दूसरों को संभालना जानती हैं।
इसलिए उन्हें केवल बचाइए मत,
उन्हें सुनिए,
उन्हें समझिए,
उन्हें उड़ने दीजिए।
क्योंकि जिस दिन
हर बेटी बिना डर के मुस्कुराएगी,
उसी दिन यह दुनिया
सचमुच रहने लायक जगह बन जाएगी।
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