कहानी शायद सितारों में नहीं लिखी जाती... By Rupesh Ranjan

कहानी शायद सितारों में नहीं लिखी जाती,

पर कुछ मोड़ ऐसे होते हैं

जो हमारे चाहने से भी नहीं बदलते।


कुछ लोग आते हैं

जैसे बरसात के बाद पहली धूप,

थोड़ी देर ठहरते हैं,

और फिर किसी शाम की तरह

धीरे-धीरे उतर जाते हैं।


हम अक्सर उन्हें रोकने की कोशिश करते हैं,

अपनी दुआओं में,

अपनी आदतों में,

अपनी यादों में…

पर हर रिश्ता मुकम्मल हो,

ये ज़रूरी तो नहीं।


कुछ साथ

बस हमें मजबूत बनाने आते हैं,

कुछ लोग

हमें हमारी कीमत समझाने,

और कुछ बिछड़नें

हमें नया रास्ता दिखाने।


ज़िंदगी का सबसे कठिन सच यही है

कि हर चीज़ हमेशा के लिए नहीं होती—

न मौसम,

न लोग,

न हालात।


लेकिन खूबसूरत बात ये है

कि हर अंत के बाद

ज़िंदगी चुपचाप

एक नया दरवाज़ा खोल देती है।


इसलिए जो चला गया

उसे बद्दुआ मत दो,

जो टूट गया

उसे अपनी हार मत मानो।


क्योंकि कभी-कभी

खाली हुई जगहों में ही

नई खुशियाँ जन्म लेती हैं।


और शायद यही जीवन है—

कुछ खोकर भी

धीरे-धीरे मुस्कुराना सीख जाना।

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