How much I love you❤️❤️

तुम जानती हो…
मैं तुम्हें कितना चाहता हूँ?
शायद उतना
जितना कोई सूखी धरती पहली वर्षा को चाहती है,
जितना कोई अकेली रात
सुबह की पहली किरण का इंतज़ार करती है।

तुम्हारा नाम
मेरे भीतर किसी प्रार्थना की तरह बस गया है।
मैं जब भी थककर
इस दुनिया की भीड़ से लौटता हूँ,
मेरे मन को सबसे पहले
तुम्हारी याद ही सहलाती है।
बहुत प्यार करता हूँ तुमसे…

इतना कि अब
मेरी हर आदत में तुम शामिल हो चुकी हो।
चाय की पहली चुस्की में,
रात की आख़िरी सोच में,
सुबह की उनींदी आँखों में—
हर जगह तुम ही तुम हो।

मैं तुम्हें सिर्फ़ पाना नहीं चाहता,
मैं तुम्हारे साथ जीना चाहता हूँ।
तुम्हारे साथ
वो छोटी-छोटी खुशियाँ बाँटना चाहता हूँ
जिन्हें दुनिया अक्सर नज़रअंदाज़ कर देती है।

मैं चाहता हूँ
कि किसी शाम
हम दोनों एक शांत रास्ते पर साथ चलें,
जहाँ हवाएँ धीमे-धीमे बह रही हों,
और तुम्हारा हाथ
मेरे हाथ में यूँ ठहरा रहे
जैसे सदियों से वहीं था।

तुम्हारी आँखों में
एक अजीब सी गहराई है…
जब भी उनमें देखता हूँ,
मुझे अपना पूरा भविष्य दिखाई देता है।
एक छोटा सा संसार,
जहाँ सिर्फ़ हम हों,
हमारी बातें हों,
और वह प्रेम
जो हर दिन थोड़ा और गहरा होता जाए|

तुम्हारे पास बैठना
मेरे लिए किसी इबादत से कम नहीं।
तुम्हारी आवाज़ का धीमा कंपन
मेरे भीतर बहुत दूर तक उतर जाता है।
और जब तुम मुस्कुराती हो,
सच कहूँ—
मुझे लगता है
जैसे दुनिया की सारी उदासी हार गई हो।

मैं चाहता हूँ
कि जब कभी तुम टूटो,
तो सबसे पहले मुझे याद करो।
ताकि मैं तुम्हें
अपनी बाँहों में भरकर
तुम्हारे हर दर्द को चुपचाप बाँट सकूँ।
तुम्हें पाने की ख्वाहिश
सिर्फ़ एक चाहत नहीं है,
यह उस सुकून की तलाश है
जहाँ मेरा दिल
आख़िरकार अपना घर ढूँढ़ ले।

मैं तुम्हारे साथ
सिर्फ़ कुछ दिन नहीं,
पूरा जीवन बिताना चाहता हूँ।
मैं चाहता हूँ
कि उम्र ढलने तक
हम एक-दूसरे की आदत बने रहें।
कि किसी बरसाती रात में
हम खिड़की के पास बैठकर
पुरानी यादों पर मुस्कुराएँ…

और किसी सर्द सुबह
तुम्हारे हाथों की गरमाहट
मेरी हथेलियों में ठहरी रहे।
तुम जानती हो न…
मैं तुम्हें कितनी शिद्दत से चाहता हूँ?
इतना कि कभी-कभी
तुम्हारी अनुपस्थिति भी
मुझे तुम्हारे और करीब ले आती है।

अगर प्रेम का कोई सबसे सुंदर रूप है,
तो वह शायद यही है—
कि तुम्हें सोचते-सोचते
मेरा दिल
हर दिन थोड़ा और तुम्हारा होता जा रहा है।

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