I miss her so much desperately ❤❤
तेरे बिन ये रातें मुझसे सवाल करती हैं,
मेरी तन्हाइयाँ तेरा ही ख़याल करती हैं।
आ जा कि तेरे बिना साँस भी अधूरी लगे,
मेरी धड़कनें सिर्फ़ तेरा इंतज़ार करती हैं।
मैंने हर दुआ में तेरा नाम सजाया है,
तेरी याद को रूह में दीप-सा जलाया है।
तू अगर लौट आए मेरी वीरान दुनिया में,
मैंने हर दर्द को हँसकर गले लगाया है।
तेरे इश्क़ में इस क़दर टूटकर बिखरा हूँ,
जैसे सहरा में कोई दरिया तड़पता हो।
तू एक बार पलटकर देख ले मेरी जान,
तेरे बिन ये दिल हर रोज़ मरता हो।
तेरी आवाज़ की ख़ुशबू आज भी आती है,
मेरे वीरान दिल को चुपके से रुलाती है।
तू समझती क्यों नहीं मेरी मोहब्बत को,
तेरी याद हर रात मुझे जगाती है।
मेरी आँखों में बस तेरा ही नूर रहता है,
तेरा एहसास मेरी रूह में भरता है।
तू दूर होकर भी इतनी क़रीब लगती है,
जैसे हर साँस में तेरा ज़िक्र रहता है।
तू मिले तो लगे मुकम्मल हुई ज़िंदगी,
तेरे बिन हर खुशी अधूरी लगती है।
मैं तुझे कितना चाहता हूँ क्या बताऊँ,
मेरी रूह भी तेरी बाँहों को तरसती है।
तेरे हिज्र ने मुझे पत्थर-सा कर डाला,
मेरे लफ़्ज़ों को समंदर-सा कर डाला।
अब किसी और से दिल नहीं लगता जानाँ,
तेरी मोहब्बत ने मुझे पागल-सा कर डाला।
मैं तेरी राहों में दिल बिछाए बैठा हूँ,
तेरे लौट आने की आस लगाए बैठा हूँ।
तू चाहे तो मेरी दुनिया महका दे फिर से,
मैं आज भी तुझे ख़ुदा बनाए बैठा हूँ।
तेरी पलकों की छाँव में जीना चाहता हूँ,
तेरी बाँहों में सिमटकर मरना चाहता हूँ।
ये मोहब्बत कोई खेल नहीं मेरी जान,
मैं तुझमें ख़ुद को पूरी तरह खोना चाहता हूँ।
मेरी तन्हा रातों का उजाला तू ही है,
मेरी बेचैन रूह का सहारा तू ही है।
मैं दुनिया से लड़ जाऊँ तेरे लिए सनम,
मेरे इश्क़ का आख़िरी किनारा तू ही है।
तेरे बिना हर मौसम वीरान लगता है,
हर फूल भी मुझको हैरान लगता है।
तू पास नहीं तो कुछ भी अच्छा नहीं लगता,
ये सारा जहाँ सुनसान लगता है।
मैं तेरी याद में हर रोज़ पिघल जाता हूँ,
तेरे ख़्वाबों में चुपके से संभल जाता हूँ।
तू अगर छू ले मोहब्बत से कभी दिल मेरा,
मैं हर दर्द भूलकर बहल जाता हूँ।
तेरे इश्क़ ने मेरी रूह को सजाया है,
मेरी वीरान साँसों को महकाया है।
अब तेरे बिना कोई ख़्वाहिश नहीं बाकी,
तूने मुझे सिर्फ़ अपना बनाया है।
तेरी जुल्फ़ों की घटाओं में खो जाऊँ मैं,
तेरे लबों की हरारत में सो जाऊँ मैं।
तू अगर बाँहों में भर ले मुझे एक बार,
इस दुनिया के हर दर्द को भूल जाऊँ मैं।
तेरी मोहब्बत मेरी आदत बन चुकी है,
मेरी रूह की इबादत बन चुकी है।
अब तुझसे दूर रहना मुमकिन नहीं जानाँ,
तू मेरी सबसे ख़ूबसूरत जन्नत बन चुकी है।
मेरी हर धड़कन तेरा नाम पुकारती है,
मेरी हर साँस तुझपे ही मरती है।
तू लौट आ मेरी तन्हा दुनिया में सनम,
तेरे बिना ये रूह अधूरी लगती है।
मैं तेरे इश्क़ में सजदे किया करता हूँ,
तेरे नाम से हर दर्द जिया करता हूँ।
तू अगर पास हो तो जन्नत लगे दुनिया,
तेरे बिना हर लम्हा रोया करता हूँ।
तेरे हुस्न की चमक आज भी आँखों में है,
तेरे इश्क़ की तपिश आज भी साँसों में है।
तू चाहे दूर रह ले मुझसे कितनी भी,
मेरा दिल आज भी तेरी पनाहों में है।
मैं तेरे बिना अधूरा-सा इंसान हूँ,
तेरे इश्क़ का बरसों से मेहमान हूँ।
तू अगर छोड़ दे साथ मेरा जानाँ,
फिर इस दुनिया में मैं कहाँ हूँ।
तू मेरी रूह का सबसे हसीं अफ़साना है,
मेरी तन्हा मोहब्बत का नज़राना है।
रूपेश रंजन की तरह लिख दूँ तुझे मैं,
कि तू सिर्फ़ प्यार नहीं, मेरा पूरा ज़माना है।
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