Love poems
1. प्रेम की अनंत नदी
तुम्हारे आने से
मेरे भीतर की सूखी धरती पर
पहली वर्षा उतरी थी,
और तब जाना मैंने—
प्रेम केवल स्पर्श नहीं होता,
वह आत्मा का वह संगीत है
जो बिना वाद्य के भी सुनाई देता है।
तुम्हारी आँखों में
मैंने कई जन्मों की थकान को
आराम करते देखा है,
जैसे कोई पथिक
लंबे रेगिस्तान के बाद
अचानक किसी शांत झील तक पहुँच जाए|
तुम जब मुस्कुराती हो,
तो मेरे भीतर
हजारों दीपक जल उठते हैं,
और मेरे सारे अंधकार
धीरे-धीरे घुल जाते हैं।
मैंने तुम्हें चाहा है
किसी शोर की तरह नहीं,
बल्कि मंदिर की उस आरती की तरह
जो धीमे-धीमे
पूरे वातावरण को पवित्र कर देती है।
तुम्हारा नाम
मेरी धड़कनों की तख्ती पर
उसी तरह लिखा है
जैसे आकाश पर चाँद—
मिटाने से भी नहीं मिटता।
यदि कभी समय
हमारे विरुद्ध खड़ा हो जाए,
तो भी मैं तुम्हारा हाथ
उसी तरह थामे रखूँगा
जैसे वृक्ष
पतझड़ में भी
अपनी जड़ों का साथ नहीं छोड़ते।
तुम मेरे जीवन की
वह अनंत नदी हो
जिसमें उतरकर
मैंने स्वयं को पाया है।
2. तुम्हारी याद का चाँद
रात जब
अपनी काली चादर फैलाती है,
तब तुम्हारी याद
मेरे कमरे में चाँद बनकर उतरती है।
मैं खिड़की के पास बैठकर
तारों से तुम्हारा पता पूछता हूँ,
और हवा
धीरे से तुम्हारा नाम
मेरे कानों में रख जाती है।
तुम्हारी अनुपस्थिति भी
कितनी उपस्थित रहती है—
जैसे किसी बंद किताब में
अब भी महकता हो गुलाब।
तुम्हारी आवाज़
मेरे भीतर
एक पुरानी कविता की तरह बस गई है,
जिसे मैं हर दिन पढ़ता हूँ
और हर दिन नया अर्थ पाता हूँ।
तुम्हारे बिना
दिन तो गुजर जाता है,
पर रातें नहीं गुजरतीं,
वे तुम्हारी स्मृतियों के साथ
लंबी होती चली जाती हैं।
काश तुम देख पातीं
कि तुम्हारे बाद भी
मैं हर जगह तुम्हें ही ढूँढ़ता हूँ—
बारिश में,
संगीत में,
किताबों में,
और अपनी हर अधूरी प्रार्थना में।
तुम मेरी वह आदत हो
जो अब इबादत बन चुकी है।
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