Sanskrit shlokas...
"महात्मानां हि धैर्यमेव प्रधानं बलम् ।
न ते विपदि विचलन्ति ।"
अर्थात - '"महान व्यक्तियों की सबसे बड़ी शक्ति उनका धैर्य होता है, और वे कठिन परिस्थितियों में भी स्थिर रहते हैं ।"
"सद्भिः पुरस्तादभिपूजितः स्यात् सद्भिस्तथा पृष्ठतो रक्षितः स्यात्।
सदासतामतिवादांस्तितिक्षेत् सतां वृत्तं चाददीतार्यवृत्तः॥"
अर्थात - "व्यक्ति के कर्म ऐसे हों कि सज्जन समक्ष तो सम्मान व्यक्त करें ही, परोक्ष में भी करें । दुष्टों की बातें सह ले, और सदैव सदाचारण में संलग्न रहे ।"
"अविरुद्धं सुखस्थं यो दुःखमार्गे नियोजयेत् ।
जन्मजन्मान्तरे दुःखी स नरः स्यादसंशयम् ॥"
अर्थात - "जो व्यक्ति बिना किसी प्रतिरोध के किसी को सुख से दुःख की ओर ले जाता है, वह स्वयं जन्म-जन्मान्तर तक दुःख भोगता है - ऐसा कर्म का नियम है ।"
"कुचैलिनं दन्तमलोपधारिणं बह्वाशिनं निष्ठुरभाषितं च।
सूर्योदये चास्तमिते शयानं विमुञ्चतेश्रीर्यदि चक्राणिः॥"
अर्थात - "गन्दे वस्त्र पहनने वाले को, गन्दे दांतों वाले को, बहुत भोजन करने वाले को, कठोर कड़वे वचन बोलने वाले को, सूर्योदय के पश्चात और सूर्यास्त के समय सोने वाले को लक्ष्मी त्याग देती है, चाहे वह विष्णु ही क्यों न हों ।"
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