मरूँगा तो मैं भी एक दिन...
मरूँगा तो मैं भी एक दिन,
यह सत्य मुझे स्वीकार है।
लेकिन तब तक जीऊँगा मैं,
जैसे जीवन मेरा त्योहार है।
हर सुबह नई उम्मीद लेकर,
हर शाम नया पैगाम लिए,
गिरकर भी फिर उठ जाऊँगा,
दिल में अपने अरमान लिए।
राह कठिन हो, धूप कड़ी हो,
या किस्मत मुझसे रूठ जाए,
मैं तब तक चलता जाऊँगा,
जब तक साँसों का दीप जलाए।
मरूँगा तो मैं भी एक दिन,
पर उससे पहले यह कर जाऊँगा—
जीवन की हर एक धड़कन को,
पूरे मन से मैं जी जाऊँगा।
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मरूँगा तो मैं भी एक दिन,
लेकिन तब तक जीऊँगा मैं।
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मुझे कल की चिंता नहीं है,
मुझे आज से सहानुभूति है।
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पहले मैं इश्क़ करता था,
अब मैं काम करता हूँ।
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बहुत इश्क़ किया है मैंने
बहुत ज़्यादा
एक भी नहीं है साथ इसके बावजूद भी
मैं अब काम करने लगा हूँ
जैसे इश्क़ भी एक काम हो
अब पहले से ज़्यादा कमा लेता हूँ...
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