डर, संदेह और उलझनों के बीच आगे बढ़ना ही जीवन है...by rupesh ranjan
डर, संदेह और उलझनों के बीच आगे बढ़ना ही जीवन है...
Rupesh Ranjan
जीवन का हर नया अध्याय अपने साथ कुछ अनजाने प्रश्न लेकर आता है। जब हम किसी नई शुरुआत की ओर कदम बढ़ाते हैं, तो मन में उत्साह के साथ-साथ डर भी होता है। यह डर असफलता का हो सकता है, लोगों की राय का हो सकता है, या फिर उस अनिश्चित भविष्य का हो सकता है जिसे हम अभी देख नहीं सकते।
लेकिन केवल नई चीज़ें ही नहीं, कभी-कभी हमारा अतीत भी हमें परेशान करता है। पुराने फैसले, अधूरे सपने, गलतियाँ और खोए हुए अवसर हमारे मन में संदेह पैदा करते हैं। हम सोचने लगते हैं कि क्या हमने सही किया था, क्या हम बेहतर कर सकते थे, या क्या अब बहुत देर हो चुकी है। इसी तरह भविष्य की चिंता और वर्तमान की चुनौतियाँ भी हमारे मन को उलझनों से भर देती हैं।
सच तो यह है कि शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जिसके मन में कभी डर, संदेह या भ्रम न आया हो। ये भावनाएँ इंसान होने का स्वाभाविक हिस्सा हैं। समस्या इन भावनाओं का होना नहीं है; समस्या तब शुरू होती है जब हम इनके कारण रुक जाते हैं।
जीवन कभी भी पूरी स्पष्टता के साथ हमारे सामने नहीं आता। हमें पहले से सभी उत्तर नहीं मिलते। हमें यह भी नहीं पता होता कि हमारे निर्णय हमें कहाँ ले जाएंगे। फिर भी जीवन चलता रहता है, और हमें भी उसके साथ चलना पड़ता है। कई बार रास्ता तभी दिखाई देता है जब हम उस पर चलना शुरू करते हैं।
आगे बढ़ने का अर्थ यह नहीं है कि हमारे मन में कोई डर न हो। इसका अर्थ है कि हम डर के बावजूद कदम बढ़ाने का साहस रखें। इसका अर्थ है कि संदेहों के बीच भी अपने सपनों पर विश्वास बनाए रखें। इसका अर्थ है कि उलझनों के बावजूद अपने जीवन की दिशा को न खोएँ।
हर बड़ी उपलब्धि के पीछे ऐसे लोग होते हैं जिन्होंने अनिश्चितताओं का सामना किया, असफलताओं का जोखिम उठाया और फिर भी रुकने के बजाय आगे बढ़ना चुना। उन्हें भी डर लगा होगा, उन्हें भी संदेह हुए होंगे, लेकिन उन्होंने उन भावनाओं को अपनी यात्रा का अंत नहीं बनने दिया।
शायद जीवन का उद्देश्य एक ऐसा बिंदु पाना नहीं है जहाँ कोई डर, कोई प्रश्न या कोई संघर्ष न हो। शायद जीवन का उद्देश्य यह सीखना है कि इन सबके बीच भी कैसे आगे बढ़ा जाए। क्योंकि विकास, अनुभव और सफलता हमेशा गति में मिलते हैं, ठहराव में नहीं।
इसलिए जब अगली बार आपके मन में डर आए, कोई संदेह जन्म ले, या भविष्य धुंधला दिखाई दे, तो स्वयं को याद दिलाइए—
"मुझे सभी उत्तर अभी नहीं चाहिए। मुझे बस अगला कदम उठाना है।"
क्योंकि अंततः,
> "डर होगा, संदेह होगा, मन में कई प्रश्न होंगे; फिर भी आगे बढ़ते रहना ही जीवन का उद्देश्य है।"
Comments
Post a Comment